अनोखी परंपरा कोरबा : जहां बेटी को दहेज में दिए जाते हैं जहरीले सांप

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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शादी-विवाह में दहेज की प्रथा भारतीय समाज की एक कड़वी सच्चाई रही है। आमतौर पर दुल्हन के पिता अपनी बेटी को दहेज के रूप में महंगे तोहफे, कीमती सामान, सोने-चांदी के गहने और नकदी देते हैं। कई परिवार तो इस सामाजिक दबाव के कारण कर्ज तक ले लेते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि किसी शादी में पिता अपनी बेटी को दहेज में गहने या नकदी नहीं, बल्कि जहरीले सांप देता हो? यह बात सुनकर भले ही अचरज हो, लेकिन यह परंपरा वास्तव में भारत के एक हिस्से में आज भी जीवित है।

दहेज की यह अनोखी परंपरा छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में पाई जाती है। जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित मुकुंदपुर गांव में रहने वाला संवरा जनजाति समुदाय इस परंपरा का पालन करता है। इस समुदाय में बेटी की शादी के समय दूल्हे को दहेज के रूप में 21 जहरीले सांप दिए जाते हैं। यदि यह शर्त पूरी नहीं होती, तो विवाह संपन्न नहीं माना जाता।

यह परंपरा कोई हाल की नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही है। दरअसल संवरा जनजाति के लोगों का पारंपरिक और पुश्तैनी पेशा जहरीले सांप पकड़ना है। ये लोग सांपों को पकड़कर उन्हें दिखाने का काम करते हैं और इसके बदले लोगों से पैसे लेते हैं। इसी से उनके परिवार का भरण-पोषण होता है।

समुदाय की मान्यता है कि बेटी के पिता द्वारा दामाद को सांप देना, दरअसल उसकी आजीविका सुनिश्चित करना है। यह दहेज लालच या प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि बेटी के भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि इन सांपों के माध्यम से दामाद कमाई कर सकेगा, जिससे उसकी पत्नी यानी बेटी को जीवनभर खाने-पीने या गुजर-बसर की कोई कमी न हो। आज भले ही आधुनिक समाज दहेज प्रथा को सामाजिक बुराई मानता हो, लेकिन संवरा जनजाति की यह परंपरा हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हर परंपरा का अर्थ एक जैसा नहीं होता। यह प्रथा दिखाती है कि कुछ समुदायों में दहेज भी सामाजिक सुरक्षा और आजीविका से जुड़ा हुआ एक सांस्कृतिक प्रतीक बन चुका है।