ऋतुराज का आगमन
आप घर का दरवाजा , खिड़की, रोशनदान खोल लीजिए। बाहर ऋतुराज बसंत अपने पूरे वैभव के साथ उपस्थित है। निकलिए और उसका स्वागत कीजिए। उदासी के दस महीने कट गए। पुराने साल को पुराने कैलेंडर की तरह रद्दी में डालिए , मगर ये गौर भी कीजिएगा कि कोरोना महामारी के खौफ ने बहुत कुछ सिखाया भी। बसंत का साहस देखने लायक है, वह जिंदगी के तमाम दु:खों और संतापों को धकिया कर आपकी तरफ लपका आ रहा।
हमारे देश में ऋतुओं/मौसमों का कमाल देखने लायक है। सावन बरसता है, तो केवल खेत-खलिहान ही नहीं, सूखा मन भी भीगता है। पुरवाई चलती है, तो मन-मयूर थिरकने लगता है। ये माघ के कृष्णपक्ष की पंचमी तो असाधारण है। मन को मथने वाले देवता मंमथ, जिन्हें रूप का राजा कामदेव कहते हैं और रानी रति की षोड्शोपचार पूजा का दिन यही बसंतपंचमी है-बाकी तो आप समझदार हैं ही। वाणी की देवी सरस्वती की जयंती भी इसी दिन यानी प्रेम और मस्ती के दरम्यान विवेक व संयम का साथ किसी भी दशा में छोड़ना नुकसानदायक हो सकता है।
बसंत गहरे अर्थ में प्रकृति और मानवजीवन के बीच एकीकरण का महापर्व है। मन को बेलगाम न होने दीजिए। उत्कंठा के वेग का मनोविज्ञान समझिए। बसंत है तो क्या हुआ। अभी तो पूरा फागुन पड़ा है। आम में बौर आ गए, अब मन के बौराने का समय भी सन्निकट है। बसंत-सेना फागुन की अगवानी करने को बेताब है। इन दोनों के मध्य महाशिवरात्रि है। भूतभावन शंकर की बारात सजेगी। मैं तो कहता हूं दूल्हा के वेश में शिवदर्शन अत्यंत मंगलकारी होगा। जब गरल पीते शिव इतने उदार,आशुतोष हैं। उन्हें भार्या रूप में पर्वत-पुत्री पार्वती मिलेंगी। वहीं पार्वती, जिन्होंने भगवान शिव को पतिरुप में पाने के लिए घोर तप किया और अपर्णा कहलाईं। शिव उन्हें ब्याहकर किसी महल या रनिवास में रखने के बजाय फिर सीधे हिमालय पहुंचते हैं।
बहरहाल चारो ओर मस्ती है। जेठ की गरम हवा के बदले फागुनी बयार कानों में मधु घोल रही। गृहस्थ तो अपनी नोन लकड़ी से जूझते हुए अनुरागी मौसम में थोड़ा- थोड़ा बहक रहा, लेकिन यहां तो साधु-संन्यासियों का मन भी मचल उठा। कुछ भी हो,बासंती मौसम को मन में उतरने की आजादी दीजिए। फिर देखिए उसका असर। जीवन मे संताप कम नहीं, मगर तमाम बखेड़े व चिंताओं के बने रहने की वजह भी हमी आप हैं। दिमाग को प्रकृति से विमुख करके लोग बेतहाशा भागे जा रहे, अरे! आगे खाई हैं साथियों।-सन्तोष कुमार तिवारी, प्रवक्ता हिन्दी राजकीय इण्टर कॉलेज शंकरपुर(नैनीडाण्डा) पौड़ी गढ़वाल
