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नानी के घर जाऊंगा, दूध मलाई खाऊंगा
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By Anjali Singh
“नानी के घर जाऊंगा, दूध मलाई खाऊंगा…” जैसी पंक्तियां सुनते ही न जाने कितने लोगों के मन में एक साथ कई तस्वीरें उभर आती हैं- ननिहाल, गर्मी की छुट्टियां, मोहल्ले की क्रिकेट, छत पर बिछी चारपाई, स्कूल की छुट्टियों की...
पुरानी दिल्ली के संकरी गलियों में ज्ञान का दीपक जलाने वाला
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By Anjali Singh
दिल्ली-6 की संकरी गलियों और अजमेरी गेट के ऐतिहासिक एंग्लो-अरेबिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल की शताब्दियों पुरानी इमारत में एक शिक्षक रोजाना विज्ञान की कक्षाएं लेता है, लेकिन उसकी कहानी कक्षा तक सीमित नहीं है। मकसूद अहमद स्कूल की चार दीवारों...
कैंची से भगत सिंह को ‘नया रूप’ देने वाले डॉ. गया प्रसाद कटियार
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By Anjali Singh
कानपुर की बिल्हौर तहसील के खजुरी खुर्द गांव के फिरोजपुर के एक छोटे से दवाखाने में कैंची चलाकर भारत के क्रांतिकारी इतिहास की दिशा बदल दी। उसी कैंची ने सरदार भगत सिंह के केश और दाढ़ी को नया रूप दिया,...
कबीर जयंती : सुमिर बंदगी कर साहिब की काल नवावे माथा...
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By Anjali Singh
18 वीं शताब्दी के आरंभ में कबीर के जीवन के साथ कई चमत्कारिक बातें जुड़ने लगीं। कुछ लोगों के अनुसार वे रामानंद के आशीर्वाद द्वारा एक विधवा ब्रह्मणी के पुत्र थे। अनजाने में विधवा ब्राह्मणी को पुत्रवती होने का आशीर्वाद...
एक विरले इतिहास लेखक की स्मृति
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By Anjali Singh
इतिहास लेखन एक दुधारी तलवार की तरह है। इसमें सतर्कता और प्रामाणिकता की ऐसी डगर पर चलकर लक्ष्य पर पहुंचना होता है कि एक ओर खाई, दूसरी ओर कुआं। पर आपने यदि निष्पक्ष लेखकीय प्रतिबद्धता पर चलते हुए इसे निष्कंटक...
जॉब का पहला दिन : आज भी याद है वरिष्ठों का अपनत्व भरा स्वभाव
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By Anjali Singh
जीवन में स्मृतियां बहुत बड़ी धरोहर होती है, ईश्वर ने प्रत्येक मनुष्य को याद रखने और भूल जाने की शक्ति दी है। अपने इसी याद रखने की शक्ति के अंतर्गत जॉब के पहले दिन की ओर जाता हूं तो मधुर...
भारत की विरासत पर बड़ा सवाल: 5000 साल पुरानी सभ्यता के बावजूद राष्ट्रीय धरोहर स्थलों की नई सूची क्यों नहीं?
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By Muskan Dixit
भारत की हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक विरासत के बावजूद राष्ट्रीय धरोहर स्थलों के व्यापक दस्तावेजीकरण की मांग उठ रही है। लेख में नए सर्वे, 'नेशनल रजिस्टर ऑफ हेरिटेज साइट्स' और ऐतिहासिक, धार्मिक व प्राकृतिक स्थलों को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
हूल आंदोलन आदिवासी अस्मिता का प्रतीक
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By Anjali Singh
झारखंड में 1855 का ‘संथाल हूल’ (संथाल विद्रोह) भारतीय इतिहास की एक ऐसी क्रांतिकारी घटना है, जिसकी प्रासंगिकता आज भी उतनी ही गहरी है, जितनी ब्रिटिश काल में थी। यह केवल एक विद्रोह नहीं, बल्कि जल, जंगल, जमीन, सामाजिक न्याय...
इतिहास को इतिहास ही रहने दिया जाय!
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By Anjali Singh
इतिहास में उन्हीं को याद रखा जाता है, जो विजयी होते हैं। सिकंदर, चंद्रगुप्त मौर्य, मुस्लिम शासक या अंग्रेज सभी को उनकी विजयों के कारण इतिहास में प्रमुख स्थान मिला। हालांकि कुछ पराजित या आंशिक रूप से सफल व्यक्तित्व भी...
जॉब का पहला दिन : जब मिला जीवन का उद्देश्य
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By Anjali Singh
20 जुलाई 2010, मंगलवार का दिन मेरे जीवन का ऐसा यादगार दिन है, जिसे मैं कभी नहीं भूल सकता। इसी दिन मैंने शिक्षा क्षेत्र तारुन, जनपद अयोध्या (तत्कालीन फैजाबाद) के प्राथमिक विद्यालय पचगवां में सहायक अध्यापक के रूप में अपनी...
संस्मरण : ज्ञान और कौशल
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By Anjali Singh
ज्ञान, कौशल और जीवन मूल्यों को आत्मसात करने की प्रक्रिया को समेकित रूप से शिक्षा कहा जा सकता है। एक शिक्षित व्यक्ति के लिए अपनी योग्यता के अनुरूप कार्य प्राप्त करना भी एक बड़ी चुनौती होती है। वर्ष 2004 के...
Happy Father's Day: मां की तरह 'बहलाता' नहीं, गलतियों पर 'कूटता' है पिता... क्योंकि वह आपको खुद से आगे देखना चाहता है!
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By Muskan Dixit
नीरज मिश्र, लखनऊ, अमृत विचार: पिता पालन है, पोषण है, परिवार का अनुशासन है। पिता धौंस से चलने वाला प्रेम का प्रशासन है। पिता अपनी इच्छाओं का हनन और परिवार की पूर्ति है। पिता रक्त में दिये हुए संस्कारों की...
