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लुप्त होने की कगार पर भोज वृक्ष
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By Anjali Singh
उच्च हिमालयी क्षेत्र में चीड़ और देवदार का साम्राज्य जहां समाप्त होता है, वहीं से भोज वृक्षों की दुनिया शुरू होती है, लेकिन आज जलवायु परिवर्तन, अत्यधिक दोहन, वनों की कटाई के कारण ये विलुप्त होने के कगार पर है।...
नैन्सी ग्रेस: खगोल विज्ञान की अग्रदूत
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By Anjali Singh
विज्ञान के इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व होते हैं, जिनके योगदान से पूरी दुनिया का ज्ञान-विज्ञान नई दिशा प्राप्त करता है। नैन्सी ग्रेस रोमन ऐसी ही एक महान खगोलविद् थीं, जिन्हें आधुनिक अंतरिक्ष खगोल विज्ञान की अग्रदूत माना जाता है।...
मघा के बरसे माता के परसे
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By Anjali Singh
कहावत है-“मघा के बरसे और माता के परसे ही आत्मा तृप्त होती है।” अर्थात मघा नक्षत्र में हुई वर्षा धरती को और मां के हाथ का भोजन मनुष्य को तृप्त करता है। लोकमान्यता है-“मघा न बरसे, भरे न खेत; मां...
आइजोल : प्रकृति की गोद में बसी साइलेंट सिटी
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By Anjali Singh
शिमला, नैनीताल, मसूरी आने-जाने में अगर भीड़भाड़, यातायात जाम तथा शोर से ऊब चुके हैं और किसी शांत पहाड़ी शहर की तलाश में हैं, तो मिजोरम की राजधानी आइजोल से बढ़िया कोई दूसरा पर्यटन स्थल नहीं हो सकता है। उत्तर-पूर्व...
विभाजन की त्रासदी के बीच इंसानियत की मिसाल: जब दिल्ली में फरिश्तों ने संभाला था शरणार्थियों का दर्द
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By Muskan Dixit
सिविल लाइंस के ब्रदरहुड हाउस और सेंट स्टीफंस अस्पताल से जुड़ी हैं मनोज कुमार की यादें, 1947 की हिंसा के बीच स्वयंसेवकों और चिकित्सकों ने हजारों विस्थापितों की मदद की
माटी के वे वीर, जिन्होंने तिरंगे के लिए दे दी जान; शाहजहांपुर के रणबांकुरों की शौर्यगाथा
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By Muskan Dixit
आजादी की लड़ाई से लेकर भारत-चीन और भारत-पाक युद्धों तक शाहजहांपुर के जवानों ने दिखाई अदम्य वीरता, विभिन्न सैन्य अभियानों में भी कई वीरों ने दिया सर्वोच्च बलिदान
स्वाधीनता की रक्षा के लिए आत्ममंथन जरूरी, लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना समय की मांग
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By Muskan Dixit
स्वतंत्रता दिवस केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि समानता, न्याय, लोकतांत्रिक मर्यादा और राष्ट्रहित से जुड़ी चुनौतियों पर विचार करने का अवसर भी है
हरियाली तीज: प्रकृति की हरियाली, नारी शक्ति और शिव-पार्वती के प्रेम का उत्सव
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By Muskan Dixit
सावन की हरियाली से लेकर झूलों, मेहंदी और लोकगीतों तक—हरियाली तीज भारतीय परंपरा में प्रकृति, आस्था और नारी चेतना को जोड़ने वाला पर्व है
जॉब का पहला दिन : जब मैंने अपने सपनों को नौकरी की मेज पर रखा
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By Anjali Singh
जीवन में कुछ तारीखें कैलेंडर के पन्नों पर दर्ज होती हैं और कुछ सीधे दिल पर। मेरी नौकरी का पहला दिन भी ऐसी ही एक तारीख है, जिसे मैं आज भी याद करती हूं, तो मन के किसी कोने में...
कारी बदरिया बहनी लागे, बदरा भैया लगे हमार
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By Anjali Singh
बरसात का महीना बड़ा सुहावना होता है। सावन और भादों दोनों महीनों में झमाझम पानी बरसता है। किसान, मयूर और धरती थिरकने लगती है। अनेक तीज त्योहार मनाए जाते हैं। अवध, बृज और बुंदेलखंड आदि क्षेत्र में वर्षा का आगमन...
1857 क्रांति में उपजी एक अधूरी प्रेम कहानी
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By Anjali Singh
शाहजहांपुर में 1857 की क्रांति के दौरान एक प्रेम कहानी भी उपजी थी, लेकिन वह प्रेम कहानी बाद में अधूरी रह गई। इस प्रेम कहानी पर एक फिल्म जुनून भी बनी। इस फिल्म के हीरो शशि कपूर थे। उन्होंने जावेद...
जंगल, बादल, सुरम्य वादियां और पनचक्कियां
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By Anjali Singh
मध्य प्रदेश में पचमढ़ी अगर एकलौते हिल स्टेशन का रुतबा रखता है, तो सतपुड़ा की सुरम्य वादियों में बसे बैतूल जिले में कुकरू प्रकृति की गोद में छिपे उस अनमोल रत्न जैसा है, जिसके बारे में दावा किया जा सकता...
- Pradeep Kumar
[email protected] - Ateeq Khan
[email protected] -
Ankit Yadav
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