जॉब का पहला दिन: पहली बार ऑफिस पहुंचने पर हुआ जोरदार स्वागत

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Published By Anjali Singh
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मैं स्वभाव से सरल हूं और अपने कार्यों के प्रति पूरी गंभीरता रखता हूं। वर्तमान में मैं कानपुर में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) के पद पर कार्यरत हूं। जब मैं पहली बार परिवार कल्याण विभाग में जिला प्रशासनिक अधिकारी के रूप में सहारनपुर पहुंचा, तो स्नेहपूर्ण और भव्य स्वागत मेरे लिए उत्साहवर्धक था, लेकिन मेरा लक्ष्य केवल प्रशंसा पाना नहीं था। मेरी दृष्टि हमेशा आगे बढ़ने और ऊंचाइयों को छूने पर केंद्रित रही है।

मेरी इस यात्रा में मेरे पिता ओ.पी. सिंह का आशीर्वाद और उनके द्वारा दिए गए संस्कार मेरी सबसे बड़ी पूंजी रहे हैं। उन्होंने मुझे अनुशासन, परिश्रम और ईमानदारी का महत्व सिखाया। इन्हीं मूल्यों के कारण मैंने प्रतिदिन 8 से 9 घंटे अध्ययन कर पीसीएस परीक्षा की तैयारी की। निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर वर्ष 2013 में मुझे पीसीएस में सफलता प्राप्त हुई।

मेरी पहली नियुक्ति मुजफ्फरनगर में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) के रूप में हुई। उस समय लोगों की शुभकामनाएं और बधाइयां मुझे नई जिम्मेदारियों के लिए और अधिक प्रेरित करती रहीं। इसके बाद मुझे लखनऊ, बिजनौर और लखीमपुर खीरी जैसे जिलों में सेवा करने का अवसर मिला, जहां मैंने प्रशासनिक अनुभव को और गहराई से समझा।

वर्तमान में कानपुर में कार्य करते हुए मेरा प्रयास रहता है कि जनता की समस्याओं का समाधान ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ करूं। मेरा दृढ़ विश्वास है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और उसके लिए मन लगाकर परिश्रम किया जाए, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। मेरा जीवन अनुभव आज के युवाओं के लिए यही संदेश है कि सफलता का मार्ग अनुशासन, संघर्ष और आत्मविश्वास से होकर ही गुजरता है। लेखक- आलोक कुमार सिंह, एआरटीओ कानपुर