कानपुर : पहले प्रयास में ही रामस्वरूप को मिला था आईआईटी में प्रवेश

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Published By Virendra Pandey
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कानपुर, अमृत विचार। आईआईटी के पीएचडी छात्र राम स्वरूप के परिजन बुधवार पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। बेटे का शव देख फफक पड़े। चचेरे भाई ने कहा, होनहार था रामस्वरूप। पहले प्रयास में उसका आईआईटी में प्रवेश हुआ था। वह एथलीट था, जल्द हार मानने वाला नहीं था। वह जरूर किसी प्रेशर में था। जिससे उसने छठी मंजिल से छलांग लगाई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उसके शरीर की 11 हड्डियां टूटी हैं। जिसमें कूल्हा, पैर, सिर की हडि्डयां शामिल हैं। कोमा में जाने के कारण मौत की पुष्टि हुई है।

राजस्थान के चूरू निवासी राम प्रताप ईश्वर के तीन बेटों में 25 वर्षीय राम स्वरूप ईश्वर तीसरे नंबर के थे और आईआईटी से पीएचडी छात्र थे। रामस्वरूप एए-21 न्यू एसबीआरए बिल्डिंग में रहते थे। बड़े भाई टे रामपाल, राम निवास हैं। चचेरे भाई राजेंद्र चौधरी ने बताया कि रामस्वरूप अपनी पत्नी मंजू और बेटी चारू को बीते रविवार को ही लेकर आया था। उसकी पत्नी गर्भवती भी है। उन्होंने बताया कि रामस्वरूप रविवार यहां आने से पहले रिसर्च के लिए अपने साथी के साथ राजस्थान आया था, जहां शोध के लिए कुछ संग्रह किया था। लौटते समय परिवार लेकर आया। छठी मंजिल से कूदने से पहले उसने पत्नी से कहा था कि लैब जा रहा है। इसके बाद लैब नहीं गया, पत्नी से कहा बालकनी में चलते हैं। फिर वह बालकनी से कूद गया। राजेंद्र के अनुसार राम स्वरूप ने कभी एंग्जाइटी की समस्या नहीं बताई। उसे तनावग्रस्त नहीं देखा। वह बहुत होनहार था। 

उसने जिस तरह आत्महत्या की, उससे लगता है बहुत ज्यादा प्रेशर में था। वहीं रामस्वरूप के दोस्त राजीव ने बताया उसे सिजोफ्रेनिया नामक बीमारी थी। मौजूदा समय बीमारी लो फेज में थी। आईआईटी में उनका इलाज चल रहा था। सोमवार शाम दोस्तों के साथ रामस्वरूप को फिजिशियन के पास ले गए थे। फिजिशियन ने रामस्वरूप के काउंसलर से कहा कि यहां से रेफर कर दो। इसके बाद काउंसलर ने घर भेज दिया था। मंगलवार को बुलाया था, लेकिन उससे पहले वह छठी मंजिल से कूद गया।

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