UP : मध्यांचल में बिजली चोरों की संख्या 98,840, राजस्व वसूली बनी चुनौती

Amrit Vichar Network
Published By Virendra Pandey
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लखनऊ, अमृत विचार: मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के 19 जिलों में बिजली चोरी के मामलों की संख्या 98,840 है, जिनसे करीब 1,229 करोड़ रुपये का बकाया राजस्व है। निगम के अभियंता और विजिलेंस टीम को इस बड़े बकाये को वसूलने में पसीने छूट रहे हैं। एक दिसंबर-25 से निगम ने बकाये और बिजली चोरों के लिए मुश्त समाधान योजना (ओटीएस) शुरू की थी। पहले चरण में 50 प्रतिशत की छूट दी गई, लेकिन केवल लगभग 10,000 लोगों ने इसका लाभ उठाया।

चार जनवरी 2026 से ओटीएस का दूसरा चरण शुरू हुआ, जिसमें छूट प्रतिशत घटाकर 45 प्रतिशत कर दिया गया। इसके बावजूद 21 जनवरी तक सिर्फ 5,000 बिजली चोरों ने पंजीकरण कर लाभ लिया। विशेषज्ञों का कहना है कि कुल बिजली चोरों में मात्र 15.1 प्रतिशत से भी कम लोगों ने ओटीएस योजना का लाभ उठाया है। शेष 83,000 बिजली चोरों से कई सौ करोड़ रुपये का राजस्व वसूलना अब बड़ी चुनौती बन गया है। विद्युत सप्लाई कोड के अनुसार, निगम ने बकाया राशि मिलने के बाद रिपोर्ट संबंधित थेफ्ट थानों को भेजी और ऐसे मामलों में चल रहे मुकदमे समाप्त कर फाइनल रिपोर्ट देने का दावा किया गया है। एमडी रिया केजरीवाल ने अभियंताओं को साफ निर्देश दिए हैं कि शेष बिजली चोरों से राजस्व वसूली सुनिश्चित की जाए। वहीं अब तक बिजली चोरों से निगम को मात्र 58 करोड़ रुपये ही राजस्व मिला है। न देने योग्य है कि निगम ने बिजली चोरी के मामले में किसी भी किलोवाट या श्रेणी में विभाजन नहीं किया है। इसका मतलब है कि कोई भी बिजली चोर भले ही कितनी भी बिजली चोरी करता हो,ओटीएस योजना का लाभ लेने के लिए पात्र है।

मध्यांचल में शामिल जिले हैं :

लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, उन्नाव, सीतापुर, हरदोई, लखीमपुर खीरी, बदायूं, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, अयोध्या (फैजाबाद), सुल्तानपुर, अंबेडकरनगर और अमेठी।

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