अंतर्राष्ट्रीय हिंदी दिवस पर विशेष: हिंदी के वैश्वीकरण में डिजिटल संसाधनों का योगदान 

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Published By Anjali Singh
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भाषा किसी भी समाज की आत्मा होती है। वह केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा, विचारधारा और सामूहिक चेतना की संवाहक होती है। हिंदी भाषा भारतीय समाज की ऐसी ही जीवंत अभिव्यक्ति है, जिसने सदियों से जनसाधारण की भावनाओं, संघर्षों और आकांक्षाओं को स्वर दिया है। समय के साथ समाज बदला है, जीवन-शैली बदली है और संचार के साधन भी बदले हैं। आज हम जिस युग में जी रहे हैं, उसे डिजिटल युग कहा जाता है। एक ऐसा युग जहां तकनीक ने दूरी, समय और सीमाओं को लगभग समाप्त कर दिया है। इस डिजिटल परिवर्तन ने भाषा के स्वरूप और प्रयोग को भी गहराई से प्रभावित किया है। कभी हिंदी का प्रचार पुस्तकों, पत्र-पत्रिकाओं, सभाओं और मंचों तक सीमित था, पर आज वही हिंदी मोबाइल स्क्रीन, कंप्यूटर, सोशल मीडिया और ऑनलाइन मंचों के माध्यम से विश्व के कोने-कोने तक पहुंच रही है। डिजिटल उपकरणों ने हिंदी को न केवल नई पहचान दी है, बल्कि उसे आधुनिक संदर्भों में अधिक उपयोगी और प्रासंगिक भी बनाया है।

डिजिटल उपकरण वे तकनीकी साधन हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली पर आधारित होते हैं और जिनका उपयोग सूचना के निर्माण, संग्रह, प्रसंस्करण और प्रसार के लिए किया जाता है। कंप्यूटर, स्मार्टफोन, टैबलेट, इंटरनेट, सॉफ्टवेयर, मोबाइल ऐप्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, ये सभी डिजिटल उपकरणों के अंतर्गत आते हैं। भाषा के संदर्भ में डिजिटल उपकरणों का महत्व इसलिए बढ़ जाता है, क्योंकि ये भाषा को बहुआयामी रूप में प्रस्तुत करते हैं। इनके माध्यम से भाषा को लिखा जा सकता है, पढ़ा जा सकता है, सुना जा सकता है और देखा जा सकता है। डिजिटल उपकरणों का उपयोग आज केवल तकनीकी विशेषज्ञों तक सीमित नहीं है। सामान्य व्यक्ति भी मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से इनका सहज उपयोग कर रहा है। हिंदी के क्षेत्र में डिजिटल उपकरणों का प्रयोग कई स्तरों पर हो रहा है।

पहला स्तर लेखन और अभिव्यक्ति का है। आज हिंदी में लेख, कविता, कहानी, ब्लॉग, समाचार और शोध-लेख कंप्यूटर और मोबाइल पर लिखे जा रहे हैं। डिजिटल टाइपिंग ने हस्तलेखन की कठिनाइयों को काफी हद तक समाप्त कर दिया है।

दूसरा स्तर प्रकाशन और प्रसार का है। पहले जहां लेखन के प्रकाशन के लिए पत्र-पत्रिकाओं पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं आज कोई भी व्यक्ति ब्लॉग, वेबसाइट या सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी रचना तुरंत पाठकों तक पहुंचा सकता है।

तीसरा स्तर श्रव्य-दृश्य माध्यम का है। यूट्यूब, पॉडकास्ट और ऑडियो बुक्स ने हिंदी को सुनने और देखने की भाषा बना दिया है। इससे निरक्षर या अर्ध-साक्षर वर्ग भी हिंदी सामग्री से जुड़ पा रहा है। चौथा स्तर शिक्षा और प्रशिक्षण का है। ऑनलाइन कक्षाओं, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म और डिजिटल पाठ्य सामग्री के माध्यम से हिंदी शिक्षण अधिक सुलभ और प्रभावी हुआ है।

हिंदी में उपलब्ध प्रमुख डिजिटल उपकरण-

हिंदी के डिजिटल विकास में यूनिकोड तकनीक का योगदान ऐतिहासिक माना जा सकता है। यूनिकोड ने हिंदी को वैश्विक डिजिटल मानक प्रदान किया। इसके परिणामस्वरूप हिंदी अब किसी विशेष फॉन्ट तक सीमित नहीं रही। इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड, गूगल हिंदी इनपुट टूल और माइक्रोसॉफ्ट इंडिक टूल्स जैसे साधनों ने हिंदी टाइपिंग को सरल बना दिया है। अब सामान्य व्यक्ति भी रोमन लिपि में लिखकर हिंदी में परिवर्तित कर सकता है। इससे हिंदी लेखन का दायरा व्यापक हुआ है।

मोबाइल ऐप्स और हिंदी-

स्मार्टफोन के व्यापक प्रसार ने हिंदी भाषा को जन-जन तक पहुंचाया है। आज समाचार, साहित्य, शिक्षा और मनोरंजन हर क्षेत्र के लिए हिंदी ऐप्स उपलब्ध हैं। हिंदी शब्दकोश ऐप्स ने भाषा को समझने में सहायता दी है। ई-बुक और ऑडियो बुक ऐप्स ने पढ़ने की आदत को डिजिटल रूप दिया है। हिंदी सीखने वाले ऐप्स ने गैर-हिंदी भाषियों को भी हिंदी से जोड़ा है।

डिजिटल प्रकाशन और हिंदी साहित्य-

डिजिटल प्रकाशन माध्यमों ने हिंदी साहित्य को नई ऊर्जा दी है। ब्लॉग और ई-पत्रिकाओं के माध्यम से नए लेखक सामने आए हैं। अब साहित्य केवल स्थापित लेखकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामान्य व्यक्ति भी अपनी रचनात्मकता को अभिव्यक्त कर सकता है। ई-बुक्स ने पुस्तकों को सस्ता, सुलभ और व्यापक बनाया है। इससे पाठक संख्या में वृद्धि हुई है और साहित्य का लोकतंत्रीकरण हुआ है। डिजिटल उपकरणों ने हिंदी के प्रचार-प्रसार को अभूतपूर्व गति दी है। इंटरनेट के माध्यम से हिंदी सामग्री कुछ ही क्षणों में विश्वभर में पहुंच जाती है। इससे प्रवासी भारतीयों और विदेशों में हिंदी सीखने वालों को भी अपनी भाषा से जुड़ने का अवसर मिला है। डिजिटल माध्यमों ने नई पीढ़ी को हिंदी से जोड़ा है। युवा वर्ग अब हिंदी में वीडियो बनाता है, ब्लॉग लिखता है और ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करता है। इससे हिंदी की छवि आधुनिक और उपयोगी भाषा के रूप में उभरी है।

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि डिजिटल उपकरणों ने हिंदी भाषा को नया जीवन, नई दिशा और नया विस्तार प्रदान किया है। ये उपकरण हिंदी के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार- तीनों में सहायक सिद्ध हुए हैं। डिजिटल युग में हिंदी का भविष्य उज्ज्वल है, बशर्ते हम तकनीक का उपयोग भाषा के सम्मान और शुद्धता के साथ करें। हिंदी और डिजिटल तकनीक का यह समन्वय न केवल भाषा का विस्तार है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना का आधुनिक रूप भी है। इस प्रकार डिजिटल संसाधनों के उपयोग से हिंदी और भारतीय संस्कृति देश के गैर हिंदी भाषीय राज्यों के साथ-साथ विदेश में भी अत्यधिक तीव्रता के साथ प्रचारित -प्रसारित हो रही है। हिंदी जब तकनीक से जुड़ती है, तब वह केवल भाषा नहीं रहती- वह एक सशक्त माध्यम बन जाती है।

प्रोफेसर मीना यादव, हिंदी विभाग     
बरेली कॉलेज बरेली-243001
ई-मेल: [email protected]