Ashadha Month 2026: इस वर्ष 59 दिन का होगा ज्येष्ठ माह, देर से आएगा आषाढ़, जानें व्रत-त्योहार और ग्रह गोचर की लिस्ट

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Published By Anjali Singh
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अयोध्या,अमृत विचार। इस वर्ष हिंदू पंचांग के अनुसार एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण संयोग बन रहा है, जिसमें ज्येष्ठ माह सामान्य रूप से 30 दिनों का नहीं, बल्कि लगभग 59 दिनों का होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि इस बार अधिकमास (पुरुषोत्तम मास या मलमास) ज्येष्ठ में पड़ रहा है, जिससे वर्ष कुल 13 महीनों का बन जाएगा। इस कारण आषाण माह देर से आएगा। ज्योतिषों के अनुसार नव संवत्सर का राजा गुरु व मंगल है, इससे देश की आर्थिक व तकनीकी प्रगति के भी आसार हैं।

19 मार्च से शुरू हो रहा हिंदू नव संवत्सर 2083 दो ज्येष्ठ लेकर आ रहा है। इनमें एक सामान्य ज्येष्ठ और दूसरा अधिक ज्येष्ठ (अधिकमास) होगा। कुल ज्येष्ठ दो मई से 29 जून तक रहेगा। सामान्य ज्येष्ठ का कृष्ण पक्ष दो मई से शुरू होकर 16 मई तक चलेगा। इसके बाद 17 मई से 15 जून तक अधिकमास (मलमास) का होगा।

इसके बाद 16 से 29 जून तक सामान्य ज्येष्ठ का शुक्ल पक्ष होगा। यह संयोग सौर वर्ष (365 दिन) और चंद्र वर्ष (354 दिन) के बीच के अंतर को संतुलित करने के लिए होता है। हर दो-तीन वर्ष में एक अतिरिक्त चंद्र मास जोड़ा जाता है, ताकि ऋतुएं और त्योहार सही समय पर रहें।

ज्योतिषों के अनुसार अधिकमास (मलमास) को भगवान विष्णु का प्रिय माह माना जाता है, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास कहते हैं। इस दौरान विष्णु पूजा, व्रत, दान, मंत्र जप, तीर्थ स्नान और धार्मिक कार्यों से विशेष पुण्य मिलता है। बताया कि अधिकमास में शादी-विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नामकरण, भूमि पूजन, नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं। ज्योतिष शास्त्रों में इसे आध्यात्मिक साधना के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता है, क्योंकि यह मास 'मल' (अशुद्धि) से मुक्त होकर सर्वश्रेष्ठ बन जाता है।

देश की आर्थिक व तकनीकी प्रगति के आसार

-आचार्य देवनाथ पांडेय के अनुसार 19 मार्च से शुरू होने वाले नव संवत्सर 2083 का राजा बृहस्पति (गुरु) और मंत्री मंगल होगा। गुरु ज्ञान, धर्म और समृद्धि के कारक हैं, जबकि मंगल ऊर्जा, साहस और प्रगति का प्रतीक है। इस युति से देश में तेजी से विकास, आर्थिक उन्नति, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय एकता में वृद्धि की संभावना है।

ग्रहों की स्थिति से शिक्षा, न्याय व्यवस्था और धार्मिक कार्यों में मजबूती आएगी, साथ ही चुनौतियों पर विजय प्राप्त होगी। बताया कि इस वर्ष रेवती नक्षत्र 85 प्रतिशत है, इससे वर्षा के भी भरपूर आसार हैं। साथ ही पुनर्वसु नक्षत्र भी 50 प्रतिशत है। इससे फसलें अच्छी होंगी, जिससे कृषक खुशहाल होंगे।

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