लखनऊ हाईकोर्ट ने सहारा शहर मामले में याचिका की खारिज, नगर निगम को मिली बड़ी कानूनी जीत
लखनऊ, अमृत विचार: हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सहारा शहर को खाली कराने के विरुद्ध दाखिल याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सहारा शहर की जमीन का मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, जहां सहारा ने इसी मामले में एक अर्जी दाखिल कर रखी है। नगर निगम ने भी उसकी उक्त अर्जी पर अपनी आपत्ति दाखिल कर दी है। कोर्ट ने कहा कि चूंकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले से ही सुनवाई कर रहा है लिहाज मौजूदा याचिका इस स्तर पर सुनवाई योग्य नहीं है।
यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने मेसर्स सहारा इंडिया कॉमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की याचिका खारिज करते हुए पारित किया है। सहारा ने नगर निगम के 8 सितंबर 2025 के आदेश को चुनौती दी थी, उक्त आदेश के जरिए निगम ने सहारा को 22 अक्टूबर 1994 को दिए गए जमीन के पट्टे को खारिज कर दिया था, साथ ही 11 सितंबर 2025 के भी आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें उक्त जमीन को खाली कराने का आदेश भी कर दिया गया था।
सहारा की दलील थी कि 2 सितंबर 2017 को एक आर्बिट्रेशन मामले में इसी जमीन को लेकर उसके पक्ष में आदेश पारित हो चुका है लेकिन नगर निगम उस आदेश की अनदेखी कर रहा है तथा गलत तरीके से पट्टे को खारिज किया है।
याचिका का नगर निगम ने विरोध किया। याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायालय की जानकारी में आया कि सहारा-सेबी विवाद में पारित आदेश को लेकर सहारा ग्रुप के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिकाएं चल रहीं है। इन्हीं याचिकाओं में सहारा ने 14 सितंबर 2025 को एक अर्जी पेश की थी जो वर्तमान मामले से भी संबंधित थी। सहारा की उक्त अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे में वह इस स्टेज पर सहारा शहर के विवाद में अलग से याचिका नहीं सुन सकता है।
