गंभीर एनीमिया से जूझ रही गर्भवती को मिलेगा ‘वन डोज’ उपचार, प्रदेश में IV-FCM शुरू

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Published By Muskan Dixit
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10 हजार से अधिक स्वास्थ्यकर्मी प्रशिक्षित, 3.7 लाख इंट्रावीनस आयरन डोज उपलब्ध

लखनऊ, अमृत विचार: राज्य सरकार ने गंभीर एनीमिया से ग्रसित गर्भवती महिलाओं के इलाज के लिए इंट्रावीनस फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (आईवी-एफसीएम) उपचार शुरू करने की घोषणा की है। “एक डोज, दो जिंदगी का वरदान” थीम के साथ स्वास्थ्य विभाग और ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला में यह जानकारी दी गई। इस इलाज को उत्तर प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने बताया कि आईवी-एफसीएम की एक खुराक से गर्भवती महिलाओं में आयरन की कमी का तेज और प्रभावी उपचार संभव है। वर्ष 2026 में प्रदेश ने 3.7 लाख इंट्रावीनस आयरन डोज की उपलब्धता सुनिश्चित की है।

10 हजार से अधिक स्वास्थ्यकर्मी प्रशिक्षित

कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 10 हजार से अधिक चिकित्सा अधिकारी और स्टाफ नर्सों को आईवी-एफसीएम सहित नवीन प्रोटोकॉल का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। साथ ही एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन, डीवॉर्मिंग, पोषण परामर्श और जांच सेवाओं को मजबूत किया गया है।

एनीमिया दर में आई कमी

परिवार कल्याण महानिदेशक डॉ. हरिदास अग्रवाल ने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के अनुसार गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की दर 52 प्रतिशत से घटकर 46 प्रतिशत हो गई है। किशोरियों और बच्चों में भी कमी दर्ज की गई है। वहीं, गर्भवती महिलाओं में आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन की कवरेज 95 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

6x6x6 मॉडल पर काम

राज्य में एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम 6x6x6 मॉडल पर संचालित हो रहा है, जिसमें छह लाभार्थी समूह, छह प्रमुख हस्तक्षेप और छह संस्थागत व्यवस्थाएं शामिल हैं। यह मॉडल प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू किया गया है।

जागरूकता और समय पर जांच पर जोर

विशेषज्ञों ने कहा कि एनीमिया की समस्या अक्सर किशोरावस्था से शुरू होती है और गर्भावस्था में गंभीर रूप ले लेती है। इसलिए समय पर जांच, संतुलित पोषण और उपचार बेहद जरूरी है।

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