लखनऊ : दूसरों की सीलिंग करने वाले नगर निगम की होने लगी कुर्की, मचा हड़कंप
लखनऊ, अमृत विचार : दूसरों की सीलिंग करने वाले नगर निगम को खुद कुर्की की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। मंगलवार दोपहर अचानक न्यायालय से अमीन और हजरतगंज पुलिस की टीम नगर निगम मुख्यालय स्थित नगर आयुक्त कार्यालय की कुर्की करने पहुंच गयी। नगर आयुक्त कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों ने अपने उच्चाधिकारियों से फोन पर बात कराई लेकिन मौके पर कोई नहीं पहुंचा। जिसके बाद टीम ने अधिवक्ताओं और पुलिस की मौजूदगी में कुर्की की कार्रवाई शुरू कर दी और कार्यालय से मेज, कुर्सियां और इन्वर्टर बााहर निकालना शुरू कर दिया, जिससे नगर निगम में हड़कंप मच गया। नगर आयुक्त गौरव कुमार के हस्तक्षेप के बाद टीम नगर निगम मुख्यालय से वापस लौट गई।
इसलिए जारी हुआ कुर्की का आदेश
कार्यदाई संस्था गंगा संस्थान और नगर निगम के अधीन डूडा के बीच में विवाद चल रहा था। गंगा संस्थान के अधिवक्ता विवेक मिश्रा ने बताया कि मामले में कोर्ट ने नगर निगम के खिलाफ एक आदेश दिया है। आदेश के अनुसार 2,17,000 रुपये का बकाया भुगतान गंगा संस्थान को करना है, लेकिन अधिकारी लापरवाही बरतते रहे। इस रकम में 6 प्रतिशत की दर से करीब 1.5 वर्ष का ब्याज जोड़कर भी दिये जाने का आदेश था। लेकिन अभी तक भुगतान नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि फर्म कैसरबाग में शेल्टर होम चला रही थी। सितंबर 2019 में नगर निगम ने संस्था का रिन्यूवल खत्म कर दिया और फर्म को जानकादी दिसंबर में दी। जिसके बाद उसका भुगतान भी नहीं किया। इसके खिलाफ फर्म सिविल कोर्ट चली गई थी। कोर्ट ने भुगतान न किए जाने को लेकर नगर निगम कार्यालय को कुर्क करने का आदेश जारी कर दिया।
यह है कोर्ट का आदेश
कोर्ट के आदेश पर 10 कंप्यूटर, 10 मेज, 50 कुर्सी, 25 अलमारी स्थित नगर निगम कार्यालय, त्रिलोकीनाथ मार्ग, लालबाग, जिला लखनऊ की कुर्की कर उसका कब्जा मुकदमे में जीती संस्था को 10 मार्च को करना है। इसके साथ ही इसका कब्जा डिक्रीदार को प्रदान करने के लिए पुलिस सुरक्षा बल प्रदान करने का निर्देश दिया गया था।
अधिकारी बचते नजर आए
दोपहर करीब 2.30 बजे सिविल कोर्ट के आदेश पर टीम नगर आयुक्त कार्यालय पहुंची। इसमें अमीन, हजरतगंज कोतवाली से पुलिस बल, गंगा संस्थान के वकील सहित अन्य लोग मौजूद रहे। पहले अधिकारियों से बातचीत की। इसके बाद कोई सही जवाब नहीं देने पर टीम ने टेबल, कुर्सी, सोफा और इनवर्टर नगर आयुक्त के कार्यालय से बाहर निकाल दिया। इसके बाद मौके पर मौजूद पुलिस नगर आयुक्त के कार्यालय से थोड़ी दूर हट गई। इस दौरान गंगा संस्थान के वकीलों और पुलिस में तकरार भी होने लगी। हालांकि, इसके बाद अधिकारियों के आश्वासन और कुछ फोन आने पर टीम करीब 4 बजे तक वापस लौट गई। नगर आयुक्त कार्यालय से निकाला गया सामान कर्मचारियों ने वापस कार्यालय में रख दिया। इसके बाद 2 सप्ताह बाद टीम ने डेट लगाने का आश्वासन दिया।
अपर नगर आयुक्त की लापरवाही आई सामने
नगर आयुक्त कार्यालय की कुर्की किए जाने की सूचना अपर नगर आयुक्त ललित कुमार को सोमवार को संबंधित पुलिस चौकी द्वारा दे दी गई थी। इसके बाद भी इस नोटिस की सूचना उनके द्वारा नगर आयुक्त और विधि विभाग को नहीं दी गई। इस लापरवाही को लेकर अपर नगर आयुक्त से जवाब मांगा गया है। आखिर कोर्ट के इतने बड़े फैसले को अपने पास ही रखने की क्या वजह थी। उनके द्वारा विधि विभाग के अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव को क्यों नहीं दी गई।
वर्जन
डूडा से कार्यदाई संस्था ने शेल्टर होम का काम किया था। यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। 13 मार्च को कोर्ट में इस आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई होनी है।
ललित कुमार, अपर नगर आयुक्त
