मऊ में मखाने की खेती में अपार संभावनाएं: तालाबों-जल स्रोतों की उपलब्धता, सरकार देगी प्रति हेक्टेयर 40 हजार का अनुदान
मऊ। उत्तर प्रदेश में मऊ जनपद के कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी के अनुसार जनपद में तालाबों और प्रचुर जल स्रोतों की उपलब्धता जहाँ मत्स्य पालन के साथ-साथ अतिरिक्त आय बढ़ाने के वास्ते मखाना की खेती के प्रोत्साहन की अपार संभावना है। किसानों को प्रोत्साहन और प्रशिक्षण देने के लिए उद्यान विभाग द्वारा सौ किसानों की प्रशिक्षण कार्यशाला बुधवार को कृषि विज्ञान केंद्र, पिलखी पर आयोजित की गयी।
कार्यशाला में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ विनय कुमार सिंह द्वारा मखाना की खेती के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि मखाना सुपर फूड के रूप में अपनी वैश्विक पहचान और मांग बना चुका है जिसमें पूरे भारत वर्ष में बिहार राज्य 80 प्रतिशत से अधिक उत्पादन कर रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के लिए जल स्रोतों जैसे तालाबों में मखाना और सिंघाड़ा की खेती करते हुए किसान ज्यादा लाभ कमा सकते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर अंगद प्रसाद, हिमांशु राय, प्रशांत देव, सुमित गुप्ता द्वारा मखाना की खेती के लिए तालाब में जल प्रबंधन, रोगों और कीटों का नियंत्रण तथा बुवाई की पद्धतियों की जानकारी विस्तार से किसानों को दी गई। कार्यक्रम में जिला उद्यान अधिकारी संदीप कुमार गुप्त द्वारा बताया गया कि मखाना की खेती के लिए सरकार 40000 रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान भी दे रही है।
तथा मखाना के खेती के लिए मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास योजना में तालाब की खुदाई पर भी अनुदान दिया जा रहा है। योजना प्रभारी अरुण कुमार यादव ने अपने संबोधन में किसानों को योजना से जुड़ने और लाभ लेने का अनुरोध किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में सभी विकास खण्डों से कृषकों के साथ साथ विभागीय कर्मचारी चंद्रभान राम, सुनील गुप्त, राजकुमार और बालजीत द्वारा प्रतिभाग़ किया गया।
