देवा शरीफ में 'जो रब है वही राम' की झलक: हिंदू-मुस्लिम बेटियों ने खेली फूलों की होली, ढोल-नगाड़ों-कव्वाली के बीच उड़ा भाईचारे का गुलाल
बाराबंकी। जिले के देवा स्थित सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की पावन दरगाह पर बुधवार को सांप्रदायिक सौहार्द का ऐसा रंग बरसा कि पूरी दुनिया के लिए वह एक मिसाल बन गया।
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करीब सवा सौ साल पुरानी इस महान परंपरा को निभाने के लिए देश के कोने-कोने से हिंदू-मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदाय के हजारों जायरीन देवा शरीफ पहुंचे।
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मजार परिसर में 'वारिस पिया' के जयकारों के बीच जब अबीर-गुलाल उड़ा, तो मजहबी दीवारें ढह गईं और चारों तरफ सिर्फ इंसानियत का रंग नजर आया। जानकारी के मुताबिक देवा की इस होली का नजारा बुधवार को बेहद खास रहा।
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दरगाह परिसर में बड़ी संख्या में पहुंची युवतियों और महिलाओं ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर और गुलाब की पंखुड़ियां बरसाकर जीत का जश्न मनाया।
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ढोल-नगाड़ों की थाप और रूहानी कव्वालियों के बीच लड़कियां एक-दूसरे का हाथ थामकर झूमती और डांस करती नजर आईं। यह दृश्य उस संदेश को जीवंत कर रहा था जो हाजी वारिस अली शाह ने दिया था—'जो रब है वही राम'।
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दरगाह पर मौजूद हर शख्स, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, एक ही रंग में रंगा नजर आया और कव्वाली की धुन पर थिरकते हुए भाईचारे का पैगाम दिया।
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गौरतलब है कि देवा शरीफ की यह होली अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान रखती है। यहाँ की विशेषता यह है कि यह उत्सव केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने का एक माध्यम है। स्था
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नीय नागरिकों ने बताया कि सदियों से चली आ रही इस परंपरा में हिंदू-मुस्लिम भाई एक साथ मिलकर गुलाल उड़ाते हैं। आज के इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
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मजार पर हाजिरी देने पहुंचे अजय कुमार निगम और प्रताप जायसवाल जैसे श्रद्धालुओं ने कहा कि यहां की होली दुनिया की सबसे खूबसूरत और सौहार्दपूर्ण होली है, जहां नफरत के लिए कोई जगह नहीं है।
