1 फरवरी 2026 से स्मार्टफोन महंगे हो सकते हैं? बजट से पहले एक्सपर्ट्स की चेतावनी, जानिए पूरा सच!

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
On

नई दिल्लीः केंद्रीय बजट 2026-27 1 फरवरी को पेश होने वाला है, और यूजर्स के मन में एक ही सवाल घूम रहा है—क्या स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ेंगी या घटेंगी? आम आदमी उम्मीद करता है कि बजट में टैक्स राहत या सब्सिडी से गैजेट्स सस्ते होंगे, लेकिन इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और मार्केट रिपोर्ट्स कुछ और ही बता रही हैं। ग्लोबल स्तर पर मेमोरी चिप्स (RAM और स्टोरेज) की भारी कमी और AI की बढ़ती मांग से कंपनियां दबाव में हैं।

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें? मुख्य वजहें

- AI बूम से चिप शॉर्टेज: AI डेटा सेंटर्स और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की वजह से मेमोरी चिप्स की डिमांड आसमान छू रही है। कंपनियां जैसे Samsung, Micron अब AI के लिए प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे स्मार्टफोन के लिए सप्लाई कम हो गई है।

- पिछले महीनों में पहले ही इजाफा: नवंबर-दिसंबर 2025 में कई ब्रांड्स ने कीमतें 21% तक बढ़ाईं। अब जनवरी-फरवरी में और 4-8% का इजाफा संभव है। कुछ ब्रांड्स जैसे Vivo, Nothing ने पहले ही ₹3,000-5,000 तक बढ़ोतरी कर दी है।

- एक्सपर्ट्स का अनुमान: Counterpoint Research और AIMRA जैसे संगठनों के मुताबिक, 2026 में स्मार्टफोन की औसत कीमत 6.9% तक बढ़ सकती है। एंट्री-लेवल (₹10,000-20,000) सेगमेंट सबसे ज्यादा प्रभावित होगा, जहां कीमतें 10-20% तक उछल सकती हैं। कुल मिलाकर, बाजार में 10-12% तक शिपमेंट गिरावट का खतरा है।

इंडस्ट्री लीडर्स क्या कह रहे हैं?

माधव सेठ (Ai+ स्मार्टफोन के CEO, पूर्व Realme CEO) के अनुसार भारत का टेक सेक्टर अब सिर्फ असेंबली तक सीमित नहीं रहना चाहिए। AI इंटीग्रेटेड डिवाइस की डिमांड बढ़ रही है, जिससे कीमतें ऊपर जा रही हैं। बजट में डीप वैल्यू क्रिएशन (कोर कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग जैसे कैमरा मॉड्यूल, बैटरी, PCB) को बढ़ावा देना जरूरी है। रिसर्च, सिस्टम डिजाइन और सॉफ्टवेयर इनोवेशन पर फोकस से लंबे समय में कीमतें कंट्रोल हो सकती हैं।

इंडस्ट्री की डिमांड: ICEA (India Cellular and Electronics Association) ने बजट में कस्टम ड्यूटी कम करने, इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर हटाने और MOOWR जैसी स्कीम्स में सुधार की मांग की है। अगर कोर कंपोनेंट्स भारत में बनने लगें, तो इंपोर्ट पर निर्भरता कम होगी और कीमतें स्थिर या कम हो सकती हैं। फिलहाल ज्यादातर फोन भारत में सिर्फ असेंबल होते हैं, पार्ट्स बाहर से आते हैं।

बजट से क्या उम्मीद?

अगर बजट में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बड़े पैमाने पर इंसेंटिव मिले (जैसे ड्यूटी कट, PLI स्कीम एक्सटेंशन), तो कीमतों में बढ़ोतरी को कुछ हद तक रोका जा सकता है। लेकिन शॉर्ट टर्म में ग्लोबल चिप क्राइसिस का असर रहेगा। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कंपनियां यूजर्स को दूर नहीं रखना चाहतीं, इसलिए कुछ ब्रांड्स डिस्काउंट्स काटकर या फीचर्स में कटौती (shrinkflation) से बैलेंस करने की कोशिश करेंगी।

संबंधित समाचार