लखनऊ : केजीएमयू के डॉक्टरों ने तीन साल की बच्ची को दिया नया जीवन, सिर से फंसी गोली को निकाला
लखनऊ। करीब डेढ़ माह पहले लखनऊ की एक बच्ची की सिर में फंसी गोली को किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के डॉक्टरों ने निकाल कर उसे नया जीवन दिया है। सर्जरी के बाद बच्ची की सेहत में सुधार है और उसे गुरुवार को डिस्चार्ज कर दिया गया है। गोली लगने के बाद परिजनों ने पहले उसे डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में दिखाया था लेकिन वहां पर डॉक्टरों ने जोखिम न लेते हुए उसे केजीएमयू रेफर कर दिया था।
दरअसल, डेढ़ माह पूर्व इंदिरा नगर बसतौली बी ब्लॉक निवासी तीन साल की मासूम लक्ष्मी घर की तीसरी मंजिल पर बने स्टोर में खेल रही तभी कहीं से फायर हुई गोली उसके सिर में लग गई। गोली लगते ही मासूम गिर पड़ी और परिजन आननफानन उसे लेकर लोहिया पहुंचे। जहां से बच्ची को केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया था।
केजीएमयू के न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ. अंकुर बजाज ने बताया कि बच्ची को 16 दिसंबर को गोली लगी थी। अगले दिन केजीएमयू पहुंचने पर कराए गए सीटी स्कैन में पता चला कि गोली बाईं फ्रंटल बोन से होते हुए मस्तिष्क के गहरे हिस्से की ओर खिसक चुकी थी। रक्त वाहिकाओं को नुकसान की आशंका को देखते हुए सीटी एंजियोग्राफी कराई गई, जिसमें सामने आया कि गोली मस्तिष्क के ऑक्सिपिटल क्षेत्र तक पहुंच गई है।
उन्होंने बताया कि यह 'माइग्रेटरी इंट्राक्रेनियल बुलेट' का अत्यंत दुर्लभ मामला था, जो छोटे बच्चों में बहुत कम देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में भर्ती के समय बच्ची सुस्त अवस्था में थी और उसके शरीर के दाहिने हिस्से में कमजोरी थी। गोली की लगातार बदलती स्थिति और न्यूरोलॉजिकल जोखिम को देखते हुए तत्काल सर्जरी का निर्णय लिया गया। ऑपरेशन के दौरान इंट्राऑपरेटिव फ्लोरोस्कोपी की मदद से गोली की वास्तविक समय में स्थिति पता कर उसे न्यूनतम मस्तिष्क क्षति के साथ सुरक्षित बाहर निकाला गया।
डॉ. अंकुर बजाज ने बताया कि सर्जरी के बाद बच्ची को बुखार और सांस लेने में परेशानी हुई, जिसके चलते उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। करीब डेढ़ माह के उपचार के बाद अब उसकी हालत में उल्लेखनीय सुधार है। बच्ची की सर्जरी करने वाली टीम में डॉ. अनुप के. सिंह, डॉ. अंकन बसु एवं डॉ. श्रद्धा, एनेस्थीसिया प्रबंधन डॉ. मोनिका कोहली और डॉ. नीलकमल शामिल रहे। जबकि पीडियाट्रिक आईसीयू के प्रो. एस.एन. सिंह, डॉ. शालिनी त्रिपाठी एवं डॉ. स्मृति जैन ने बच्ची की देखभाल की।
