भारत और EU ने की सभी तरह के आतंकवाद की निंदा, शांतिपूर्ण हिन्द प्रशांत क्षेत्र को लेकर भी जतायी प्रतिबद्धता
नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ ने सीमा पार आतंकवाद सहित सभी तरह के आतंकवाद की कड़ी निंदा की है और इससे निपटने के लिए निर्णायक और समन्वित अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों का आह्वान किया है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के अनुसार स्वतंत्र, शांतिपूर्ण और खुले हिन्द प्रशांत क्षेत्र के प्रति भी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया है। दोनों पक्षों ने यूक्रेन युद्ध के संवाद और कूटनीति के माध्यम से व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की दिशा में प्रयासों का समर्थन करने की बात कही है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा तथा यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वान डेर लेयेन की सह अध्यक्षता में मंगलवार को यहां हुए 16 वें भारत- ई यू शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की सभी रूपों और अभिव्यक्तियों जिनमें सीमा-पार आतंकवाद भी शामिल है, की स्पष्ट और कड़े शब्दों में निंदा की।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप आतंकवाद से व्यापक और निरंतर रूप से निपटने के लिए निर्णायक और समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने कट्टरपंथ और हिंसक उग्रवाद से निपटने, आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत धनशोधन-रोधी मानकों को बढ़ावा देने, आतंकवादी उद्देश्यों के लिए नई और उभरती प्रौद्योगिकियों के दुरुपयोग को रोकने तथा आतंकवादियों की भर्ती पर अंकुश लगाने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले और लाल किले के निकट हुई आतंकवादी घटना की कड़े शब्दों में निंदा की। दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप एक स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया तथा क्षेत्र में अपनी-अपनी भूमिकाओं और सहभागिता को स्वीकार किया। नेताओं ने क्षेत्र में घनिष्ठ सहभागिता का स्वागत किया, जिसमें नई दिल्ली में प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ हिंद-प्रशांत परामर्श की पहली बैठक भी शामिल है।
उन्होंने हिंद-प्रशांत महासागर पहल के तहत संयुक्त गतिविधियों और भारत की अध्यक्षता में हिंद महासागर रिम एसोसिएशन के अंतर्गत सहयोग को मजबूत करने की भी आशा व्यक्त की। यूक्रेन के संबंध में, दोनों पक्षों ने युद्ध पर चिंता व्यक्त की, जो व्यापक मानवीय पीड़ा का कारण बन रहा है और जिसके वैश्विक प्रभाव हैं। दोनों पक्ष संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों, जिनमें स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता शामिल हैं, के आधार पर संवाद और कूटनीति के माध्यम से यूक्रेन में व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की दिशा में प्रयासों का समर्थन जारी रखेंगे।
उन्होंने पिछले वर्ष 17 नवंबर को गाजा में शांति के लिए अपनाए गए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 का संज्ञान लिया, जिसमें व्यापक योजना के अनुरूप शांति बोर्ड की स्थापना का स्वागत किया गया है तथा एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल को अधिकृत किया गया है। उन्होंने इसे गाज़ा संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। दोनों ने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों के अनुरूप इस प्रस्ताव को पूर्ण रूप से लागू करने का आग्रह किया। दोनों पक्षों ने ईरान और क्षेत्र में हाल के चिंताजनक घटनाक्रमों पर भी चर्चा की।
उन्होंने मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए संवाद और कूटनीति के महत्व पर बल दिया। दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखते हुए एक प्रभावी बहुपक्षीय प्रणाली के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया, ताकि इसे अधिक प्रतिनिधि, समावेशी, पारदर्शी, दक्ष, प्रभावी, लोकतांत्रिक, जवाबदेह तथा समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाया जा सके।
उन्होंने बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली और वैश्विक व्यापार शासन में विश्व व्यापार संगठन की केंद्रीय भूमिका को भी रेखांकित किया तथा कहा कि विश्व व्यापार संगठन के कार्यों में सुधार लाने और सभी सदस्यों के उद्देश्यों को बेहतर ढंग से आगे बढ़ाने के लिए सार्थक, आवश्यक और व्यापक सुधार अत्यंत जरूरी हैं। उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा मामलों में घनिष्ठ सहयोग के महत्व को भी रेखांकित किया और स्वीकार किया कि यूरोप और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और समृद्धि आपस में जुड़ी हुई है।
