केंद्रीय बजट : कर्मचारियों को पुरानी पेंशन बहाली तो आमजन को महंगाई में राहत की आस
मुरादाबाद, अमृत विचार। केंद्र सरकार द्वारा एक फरवरी को प्रस्तुत किए जाने वाले बजट से लोगों को कई उम्मीदें हैं। हर वर्ग को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के पिटारे से राहत की फुहार मिलने की आस है। सरकारी कर्मचारियों को जहां पुरानी पेंशन योजना की बहाली प्राथमिकता है, वहीं बढ़ती महंगाई के मुंह पर अंकुश लगने की हर वर्ग ने उम्मीद लगाई है।
जिससे खासकर मध्यम व गरीब वर्ग को गृहस्थी की गाड़ी सकुशल चलाने में सहूलियत हो सके। शिक्षा, चिकित्सा व अन्य मूलभूत सुविधाओं पर सरकार की नजर इनायत हर वर्ग की चाहत है। वेतनभोगी वर्ग टैक्स के सरलीकरण की ओर टकटकी लगाए है। तो गृहणियां महंगाई पर नियंत्रण के लिए नजरें टिकाएं हैं।
एक तरफ बढ़ती महंगाई तो दूसरी ओर वेतनभोगी वर्ग को टैक्स की जटिलताओं से निजात दिलाने के लिए सरकार को कदम उठाने की जरूरत विशेषज्ञ मान रहे हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार की ओर से यदि संयुक्त आयकर रिटर्न को लेकर बजट 2026 में कोई प्रावधान किया जाता है, तो इसके लिए इन्कम टैक्स एक्ट में बड़े संशोधन करने होंगे। इसके अतिरिक्त सरकार को बजट में आईटीआर यू भरने पर आयकर रिफंड देने की व्यवस्था करनी चाहिए।
सरकार आईटीआई यू भरने पर टैक्स, ब्याज, लेट फीस, अतिरिक्त कर लेती है परंतु आयकर रिफंड होने की स्थिति में सरकार द्वारा आयकर रिफंड नहीं दिया जाता है जिससे करदाताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसके अतिरिक्त सरकार को पीपीएफ आदि योजनाओं में अंशदान करने की सीमा डेढ़ लाख से बढ़ा कर तीन लाख करने की सलाह टैक्स मामलों से जुड़े अधिवक्ता दे रहे हैं।
सरकार से है यह उम्मीदें
आत्म निर्भर भारत के लिए इस बार शिक्षा व नवाचार के लिए केंद्रीय बजट में विशेष प्रावधान करने की आवश्यकता है। मध्यम वर्ग एवं कर्मचारियों को मकान का सपना पूरा करने के लिए होम लोन की ब्याज दरों पर मिलने वाली छूट को बढ़ाया जाना उचित होगा। साथ ही इनकम टैक्स में जीरो टैक्स की लिमिट को अगर 12 लाख से 15 लाख कर दिया जाए तो बड़ी राहत हो सकती है।- राहुल शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ महानगर
टैक्स मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता गौरव गुप्ता ने बताया कि पति-पत्नी को संयुक्त आयकर रिटर्न फाइल करने का विकल्प मिले। वर्तमान में भारत में पति और पत्नी को अलग-अलग पैन नंबर के आधार पर अलग-अलग आयकर रिटर्न फाइल करना होता है। यह प्रणाली अमेरिका और ब्रिटेन जैसे कई देशों में पहले से लागू है। इस व्यवस्था को वैकल्पिक रखा जाना चाहिए, जिससे करदाता सुविधा के अनुसार स्वयं या संयुक्त आयकर रिटर्न में से कोई एक चयन कर सके।
डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन जिलामंत्री हेमन्त चौधरी ने बताया कि पुरानी पेंशन, ठेकेदारी प्रथा और संविदा की जगह स्थाई रोजगार की घोषणा होनी चाहिए। सभी को चिकित्सा और स्वास्थ्य का अधिकार मिले। सरकारी कर्मचारी अधिक इनकम टैक्स देते हैं। उम्मीद है कि सरकार कुछ राहत देगी। देश में ड्रग रिसर्च, निर्माण, औषधि व्यापार , चिकित्सालयों में फार्मेसिस्ट की अनिवार्यता के साथ चिकित्सालयों में फार्माकोविजिलेंस की घोषणा की जानी चाहिए।
