Bareilly: जलकल विभाग की कार्यशैली, सड़क बनी खतरे की घंटी

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। सड़क खोदो, पाइप लाइन डालो और फिर जनता को उसके हाल पर छोड़ दो-यही शायद नगर निगम के जलकल विभाग की ''स्मार्ट'' कार्यशैली बन चुकी है। शहर की सबसे बड़ी और व्यस्त गल्ला मंडी श्यामगंज मानी जाती है। वह इन दिनों बरेली स्मार्ट सिटी के जिम्मेदारों की उदासीनता का शिकार है।

साहू गोपीनाथ कॉलेज से फ्लाईओवर तक पेयजल पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा हुए एक सप्ताह से अधिक का समय हो चुका है, बावजूद सड़क को दुरुस्त करना जरूरी नहीं लगा। नतीजतन, बारिश से सड़क पूरी तरह दलदल में तब्दील हो चुकी है, गड्ढों में भरा कीचड़ और फिसलन हर गुजरते शख्स के लिए खतरे की घंटी बन गई है। हालात ऐसे हैं कि पैदल चलना तक दूभर है, वाहन चालकों को भी जोखिम उठाना पड़ रहा है।

श्यामगंज में किराना, अनाज, दाल, मसाले समेत कई तरह की थोक और फुटकर दुकानें हैं। इन पर पूरे इलाके की निर्भरता है। सुबह से देर रात तक यहां आवाजाही रहती है, लेकिन अब व्यापारी दुकान खोलते वक्त भी सहमे रहते हैं कि कहीं कोई ग्राहक फिसल न जाए या कोई वाहन गड्ढे में फंसकर हादसे का शिकार न हो जाए।

दुकानदारों का कहना है कि इंदौर में दूषित पानी से कई लोगों की मौत के बाद पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू किया गया था। तब दावा किया गया था कि एक सप्ताह में काम पूरा कर सड़क को पहले से बेहतर बना दिया जाएगा, लेकिन हकीकत यह है कि 15 दिन बीतने के बाद भी सड़क बदहाली का शिकार है। पाइपलाइन डालकर सड़क को यूं ही छोड़ देना न सिर्फ लापरवाही है, बल्कि आमजन की सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ भी है, लेकिन जिम्मेदार अफसर आंख मूंदे बैठे हैं।


फोन तक नहीं उठाते अधिकारी, जनता कर रही संघर्ष
श्यामगंज की सड़क दलदल बन चुकी है। दुकानदार और ग्राहक दोनों सहमे हैं, लेकिन सबसे बड़ी परेशानी यह है कि जलकल विभाग वाले फोन तक नहीं उठाते। इसे लेकर पूर्व में जलकल के महाप्रबंधक और सहायक अभियंता पर मेयर से लेकर नगर आयुक्त तक नाराजगी जा चुके हैं, लेकिन रवैया अब भी नहीं सुधरा है। ऐसे में सवाल उठता है, जब विभाग ही सक्रिय नहीं, तो जनता को ही अपने स्तर पर संघर्ष करना पड़ेगा।

भगवान स्वरूप ने कहा कि ठेकेदार ने पाइप लाइन डाल कर किनारा कर लिया है। इससे माल उतारना मुश्किल हो गया है। बारिश से रोड पर फिसलन हो गई है। सुबह से शाम तक कई लोग गिरते हैं। अगर यह स्मार्ट सिटी है तो फिर आम लोगों की सुरक्षा कहां है? दुकानदार देवीदास के मुताबिक श्यामंगज में सड़क की हालत इतनी खराब है कि ग्राहक आते हुए भी डरते हैं। इस फिसलन में अगर किसी के साथ बड़ा हादसा हो गया तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? स्मार्ट सिटी के नाम पर सिर्फ कीचड़ और परेशानी मिली है।

कर्मचारी अनिमेष ने बताया कि हर दिन इसी रास्ते से गुजरता हूं, लेकिन अब डर लगता है। सड़क काफी ऊबड़-खाबड़ है। बुधवार को तो फिसलन इतनी रही कि पैर रखते ही संतुलन बिगड़ जाता। दुपहिया वाहन चालकों को भी आने-जाने में परेशानी उठानी पड़ रही है। व्यापारी त्रिलोकी नाथ गुप्ता ने बताया कि पाइपलाइन का काम हो गया, लेकिन सड़क ऐसे ही छोड़ दी है। जिस कारण ट्रक और ठेले गड्ढों में फंस जाते हैं, माल उतारना मुश्किल हो गया है। बारिश में हालात और खराब हो गए हैं, मगर जिम्मेदारों पर कोई फर्क पड़ता नहीं दिख रहा।

 

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