बसंत पंचमी पर आज अबीर गुलाल खेलेंगे सिया संग राजाराम, राम मंदिर मे अबीर-गुलाल लगाए जाने के परंपरा की शुरुआत 

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Published By Anjali Singh
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सत्य प्रकाश/अयोध्या, अमृत विचार। राम मंदिर में पहली बार सिया संग प्रभु राजाराम बसंत पंचमी पर आज अबीर गुलाल खेलेंगे। जिसके साथ ही मठ मंदिर में रंगोंत्सव की छटा बिखेरने लगेगी। रंगों की तो कहीं फूलों की होली के साथ मंदिर में भगवान के समक्ष गीत-संगीत का आयोजन होगा है। जिसे मंदिरों में अपने अलग-अलग परंपरागत रूप से 40 दिनों तक यह उत्सव मनाया जाएगा।

23 जनवरी की सुबह बसंत लगने के बाद से ही मंदिरों में भगवान का अभिषेक श्रृंगार के साथ अबीर-गुलाल लगाए जाने के परंपरा की शुरुआत होगी। राम मंदिर, हनुमानगढ़ी सहित लगभग 5000 मंदिरों में इस उत्सव को भव्यता के साथ बनाए जाने की तैयारी है। मंदिर के गर्भ ग्रह में प्रतिदिन दोपहर में भगवान को तरह-तरह के पकवान से भोग लगाए जाएंगे। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से पूरा मंदिर परिसर आनंद विभोर होकर उत्सव मनाएगा। 

इस उत्सव को और भी भव्यता देते हुए साधु संत विभिन्न प्रकार की आयोजन को भी संपन्न करेंगे। रंगों की होली, फूलों की होली, संतों की होली, भक्तों की होली के दृश्य भी दिखाई देंगे। मुख्य रूप से कनक भवन, लाल साहब दरबार, बड़ा भक्माल, राम बल्लभ कुंज, चौभुजी मंदिर, मंगल भवन, दशरथ महल, राम हर्षद कुंज, जानकी महल, तपस्वी छावनी, चारु शिला मंदिर, बधाई भवन मंदिर, वैदेही मंदिर, बावन मंदिर में उत्सव को भव्य रूप मनाया जायेगा।

बड़ा भक्तमाल के माल अवधेश दास ने कहा कि बसंत पंचमी के बाद से ही रंग, अबीर, गुलाल के साथ होली उत्सव प्रारंभ हो जाता है। जो दिन पर्यंत चलता है। उसी के उपलक्ष्य में भगवान श्री सीताराम जी की दिव्य होली महोत्सव का कार्यक्रम किया जाता है। जिसमें अयोध्या के सभी संत महंत शामिल होते हैं।

वहीं जानकी घाट बड़ा स्थान के महंत जनमेजय शरण ने बताया कि अयोध्या का भव्य सुंदरीकरण हो रहा है। सभी संत हर्ष उत्साहित है। होली महोत्सव को अलग-अलग मंदिरों में मनाया जायेगा और पूरी अयोध्या में श्री सीताराम जी के फूलों की होली खेलेगी। यह भगवान से जुड़ने और जोड़ने की होली होती है।

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