अब साल में दो बार होंगी पीएचडी प्रवेश परीक्षा, दिल्ली विश्वविद्यालय का शोध मॉडल लखनऊ विश्वविद्यालय करेगा लागू
लखनऊ, अमृत विचार: लखनऊ विश्वविद्यालय शोध के क्षेत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के मॉडल को अपनाने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा विश्वविद्यालय से जुड़े महाविद्यालयों में भी शोध केंद्र स्थापित किए जाएंगे और शोध सुविधाओं का विकास किया जाएगा। नवनियुक्त कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने गुरुवार को गणित व खगोलशास्त्र विभाग का दौरा किया और यंत्रों का निरीक्षण कर शोध कार्यों की जानकारी हासिल की।
कुलपति ने शिक्षक कल्याण कोष का उचित लेखा-जोखा रखने, समय सारणी का पालन सुनिश्चित करने और छात्रों की पुस्तकालय, ई-जर्नल्स, गणितीय डाटाबेस और संबंधित सॉफ़्टवेयर तक अधिकतम पहुंच बढ़ाने के निर्देश दिए।
लखनऊ विश्वविद्यालय से जुड़े आसपास के महाविद्यालयों में भी शोध कार्य को बढ़ावा देने के लिए शोध केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए समिति का गठन किया जाएगा। विश्वविद्यालय अब शोध सर्वेक्षण में दिल्ली विश्वविद्यालय के मॉडल को लागू करने जा रहा है।
विश्वविद्यालय वर्ष में दो बार पीएचडी प्रवेश आयोजित करेगा और विभागों में प्रवेश विकेन्द्रीकृत किया जाएगा। विशेष परिस्थितियों में पीएचडी सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। जेआरएफ न होने वाले छात्रों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। उत्कृष्ट छात्रों के लिए पीएचडी शोध प्रबंध प्रस्तुत करने की समय सीमा ढाई वर्ष तक घटाने पर भी विचार किया जा रहा है।
अब लविवि में दीक्षांत समारोह दो दिनों तक आयोजित होगा। इसके बाद गोल्डन प्राइड डिनर भी होगा। वर्ष 2025 में दीक्षांत सप्ताह के दौरान विभिन्न विभागों में कार्यक्रम आयोजित किए गए थे।
