बाराबंकी : दूर-दराज के देशों से आए प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से झीलें हुईं गुलजार, कलरव से गूंजा माहौल

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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अकील अंसारी/सूरतगंज/बाराबंकी,अमृत विचार। सर्दियों के चलते बाराबंकी की झीलें प्रकृति के अनोखे रंगों से सज गई हैं। दूर-दराज के देशों से आए हजारों प्रवासी पक्षियों ने जिले की झीलों में अपना अस्थायी बसेरा बना लिया है। उनकी चहचहाहट, कलरव और झीलों के ऊपर मंडराते झुंड न सिर्फ वातावरण को जीवंत बना रहे हैं, बल्कि स्थानीय लोगों और राहगीरों के लिए यह नज़ारा किसी उत्सव से कम नहीं है। 

ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, साइबेरिया, रूस, जापान और तिब्बत जैसे देशों से आए ये रंग-बिरंगे मेहमान झीलों की शोभा बढ़ा रहे हैं। जिले में एक दर्जन से अधिक झीलें हैं, जो हर साल सर्दियों में प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा ठिकाना बनती हैं। प्रमुख झीलों में हरख की लंबौआ, हैदरगढ़ की नरदही, फतेहपुर की भगहर, सदर की कमरावां, देवा की सलारपुर, रामनगर की सगरा, रामसनेहीघाट की सराय बरई और बेलहरा की किरकिच्ची झील शामिल हैं। 

विशेष रूप से तहसील रामनगर क्षेत्र की सगरा झील इस समय प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार है। यहां सुर्खाब (गोल्डन डक), पिंटेल, गीज, वॉल कीपर, ब्लैक स्टार्ट और करबोरेंच जैसी दुर्लभ प्रजातियों की आमद देखी जा रही है। शांत पानी पर तैरते और खुले आसमान में उड़ते ये पक्षी देखना किसी को भी मंत्रमुग्ध कर देता है। जैसे-जैसे ठंड बढ़ी, प्रवासी पक्षियों की संख्या में भी इजाफा हुआ। 

साइबेरिया, तिब्बत और हिमालयी ऊंचे इलाकों से आए ये पक्षी सुरक्षित माहौल और भरपूर भोजन की तलाश में यहां पहुंचे हैं। गुनगुनी धूप में झीलों के ऊपर उड़ते उनके झुंड राहगीरों को ठहरकर देखने पर मजबूर कर देते हैं। स्थानीय लोग और पक्षी प्रेमी इस दृश्य को उत्सव के रूप में मना रहे हैं। उनका मानना है कि यदि झीलों का संरक्षण और स्वच्छता इसी तरह बनी रही, तो आने वाले वर्षों में प्रवासी पक्षियों की संख्या और भी बढ़ेगी, जिससे बाराबंकी प्राकृतिक पर्यटन स्थल के रूप में और अधिक प्रसिद्ध होगा।

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