आर्ट गैलरी: अतियथार्थ का स्वप्नलोक

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Published By Anjali Singh
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1929 में निर्मित साल्वाडोर डाली की प्रसिद्ध कृति “प्रकाशित सुख” अतियथार्थवादी कला की एक महत्वपूर्ण आधारशिला मानी जाती है। यह चित्र केवल दृश्य सौंदर्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दर्शक को अवचेतन मन की रहस्यमय और जटिल परतों में प्रवेश करने के लिए प्रेरित करता है। 

स्पेन के कैटालोनिया क्षेत्र में उभरते कला-आंदोलनों के प्रभाव में बनी यह रचना आंद्रे ब्रेटन और मैक्स अर्न्स्ट जैसे अतियथार्थवादी विचारकों की मुक्त और प्रयोगधर्मी चेतना को प्रतिबिंबित करती है। चित्र में एक काल्पनिक परिदृश्य उभरता है, जहां अनेक पुरुष आकृतियां असंबद्ध और तर्क से परे क्रियाओं में लीन दिखाई देती हैं। 

लहरदार, रेगिस्तानी भू-भाग के बीच स्थित एक केंद्रीय आकृति पूरे दृश्य पर प्रभुत्व स्थापित करती है, जबकि आसपास फैली अन्य आकृतियां किसी स्वप्न की भांति अलग-अलग भावनाओं और स्थितियों को व्यक्त करती हैं। सल्वाडोर डाली के बारे में- 1904 में स्पेन के फिगेरेस में जन्मे सल्वाडोर डाली का जीवन उतना ही असाधारण था, जितनी उनकी कला।

बचपन से ही उनकी प्रतिभा स्पष्ट थी, किंतु पारिवारिक अनुभवों और निजी आघातों ने उनके भीतर द्वैत और रहस्य की भावना को गहराई दी। सैन फर्नांडो अकादमी में औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद उन्होंने पारंपरिक सीमाओं को अस्वीकार किया और अपनी स्वतंत्र शैली विकसित की। पुनर्जागरण की तकनीकी परिपक्वता और स्वप्निल कल्पना के अद्वितीय मेल ने डाली को अतियथार्थवाद का सबसे प्रभावशाली चित्रकार बना दिया।