मुरादाबाद : देश के लिए सोना लाऊंगी, अनगिनत माही की ममता कुर्बान

मुरादाबाद : देश के लिए सोना लाऊंगी, अनगिनत माही की ममता कुर्बान

आशुतोष मिश्र/अमृत विचार । माही (बेटी) को मैंने नौ माह गर्भ में पाला है। लेकिन, इसे छह माह बाद बेटी देखी तो आंखें नदी बन गईं। हमने बेटी इसे छाती से दुबका लिया। मगर, मासूम मेरा मुंह देखती रही, जिसके बाद मैं सिहर उठी। घर के लोग खुश हुए, पर मेरा कलेजा रो पड़ा। मगर, …

आशुतोष मिश्र/अमृत विचार । माही (बेटी) को मैंने नौ माह गर्भ में पाला है। लेकिन, इसे छह माह बाद बेटी देखी तो आंखें नदी बन गईं। हमने बेटी इसे छाती से दुबका लिया। मगर, मासूम मेरा मुंह देखती रही, जिसके बाद मैं सिहर उठी। घर के लोग खुश हुए, पर मेरा कलेजा रो पड़ा। मगर, यह दर्द मुझे मंजूर है। मैं देश के लिए अनगिनत माही की ममता कुर्बान कर सकती हूं। लेकिन, सोना लेकर ही लौटूंगी।

अंतरराष्ट्रीय एथलीट सरिता रोमित सिंह ने यह बात अमृत विचार से विशेष बातचीत में कही। पटियाला (पंजाब) कैंप से घर आई सरिता की मासूम बेटी अब ढाई साल की हो गयी है। उसे देखकर भावुक सरिता कहतीं हैं कि छह माह बाद एनआईएस की कोचिंग से लौटी हूं। अब इंग्लैंड में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम और चाइना के एशियन गेम्स में झंडा फहराना है। वह बताती हैं कि कॉमनवेल्थ गेम्स 25 जुलाई से आठ अगस्त तथा एशियन गेम्स चाइना में 10 से 25 सितंबर के बीच होना है।

सुबह-शाम रोजाना तीन से चार घंटे अभ्यास करने वाली सरिता कहतीं हैं कि जज्बा से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। संभल जिले के परियावली गांव में ब्याही सरिता यहां उत्तर रेलवे के मंडल मुख्यालय पर सीनियर क्लर्क पद पर तैनात हैं। शहर के हिंदू कॉलेज से ग्रेजुएट सरिता ने साल 2009 में ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी प्रतिस्पर्धा में सिल्वर जीत लिया। उसी के आधार पर 2011 में रेलवे में नौकरी मिल गई।

नौकरी की शुरुआत गुजरात राज्य के दहोद शहर से हुई। रेलवे गेम्स फेडरेशन की ओर से 2018 में एशियन गेम्स में हिस्सा लिया। जकार्ता में आयोजित प्रतियोगिता में पांचवें नंबर की खिलाड़ी बनीं। जिसमें प्रथम और द्वितीय चाइना तथा तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की खिलाड़ी जापान की रही। सरिता पांचवें नंबर पर रहीं। कहतीं हैं कि रेलवे गेम्स फेडरेशन की ओर से मुझे एनआईएस में कोचिंग का मौका मिला है। घर पर परिवार के सदस्य मुख्य रूप से बेटी की दादी- दादा पिता के साथ परवरिस करते हैं।

32 वर्षीय सरिता देश के लिए सोना जीतने के लक्ष्य के प्रति संकल्पित हैं। जबकि वर्ष 2018 में राज्य सरकार की ओर से इन्हें पांच लाख रुपये का पारितोषिक मिल चुका है। कहती हैं कि 2021 में सीनियर नेशनल गेम्स वारंगल में मैंने हिस्सा लिया था, जहां से मुझे कैंप में भेज दिया गया। मैंने छह माह की प्रैक्टिस में कैंपस से बाहर कदम नहीं रखा। दो दिन पहले सरिता ने केरल में हैमर थ्रो का नया रिकॉर्ड अपने नाम किया है।

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