World Radio Day Special: पीएम मोदी के मन की बात से लेकर बॉलीवुड दिग्गजों ने दी रेडियो को आवाज़  

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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मुंबई। हर साल 13 फरवरी को वर्ल्ड रेडियो डे मनाया जाता है। रेडियो आज भी ऐसा माध्यम है जो दूरियों को मिटाता है, लोगों को जोड़ता है और भावनाओं को आवाज़ देता है। पॉडकास्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म से बहुत पहले, रेडियो ही बातचीत, संगीत और खबरों का सबसे भरोसेमंद ज़रिया था। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि रेडियो एक ऐसा माध्यम है जो दूरदराज के गांवों से लेकर शहरों तक, लोगों के लिए विश्वसनीय आवाज है तथा इसने समय पर जानकारी पहुंचाई है, प्रतिभा को निखारा है और रचनात्मकता को प्रोत्साहित किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हर साल 13 फरवरी को मनाया जाने वाला विश्व रेडियो दिवस इस माध्यम से जुड़े सभी लोगों के प्रयासों को पहचान प्रदान करने का एक अवसर है। 

उन्होंने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''विश्व रेडियो दिवस एक ऐसे माध्यम का जश्न मनाने का अवसर है जो दूरदराज के गांवों से लेकर शहरों तक, लोगों के लिए विश्वसनीय आवाज है। वर्षों से, रेडियो समय पर जानकारी प्रदान करता रहा है, प्रतिभा को निखारता रहा है और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करता रहा है।'' 

प्रधानमंत्री ने कहा कि अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के माध्यम से उन्होंने स्वयं रेडियो की उस क्षमता का अनुभव किया है जिसके द्वारा देश के लोगों की सामाजिक शक्ति को उजागर किया जा सकता है। उन्होंने कहा, ''इस महीने का यह कार्यक्रम रविवार, 22 फरवरी को प्रसारित होगा।'' 

मोदी द्वारा प्रधानमंत्री का पदभार संभालने के कुछ ही महीनों बाद अक्टूबर, 2024 में 'मन की बात' रेडियो कार्यक्रम शुरू हुआ था। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री के लिए शासन, सामाजिक मुद्दों पर अपने विचार और प्रेरणादायक कहानियां नागरिकों के साथ साझा करने का एक सीधा मंच रहा है। इसका प्रसारण हर महीने के आखिरी रविवार को सुबह 11 बजे होता है। 

चाहे स्वच्छता हो, सामाजिक सेवा हो, जल संरक्षण हो, खेल हो या महिला सशक्तीकरण, नागरिक अपने विचार और सुझाव प्रधानमंत्री के रेडियो कार्यक्रम के लिए उन्हें ऑनलाइन भेज सकते हैं। यूनेस्को ने 2011 में घोषणा की कि 1946 में संयुक्त राष्ट्र रेडियो की स्थापना की स्मृति में 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस के रूप में मनाया जाएगा।

बॉलीवुड के कई सितारों ने रुपहले पर्दे पर रेडियो को आवाज़ दी है। बॉलीवुड ने रेडियो को हमेशा सिर्फ़ एक पेशे के रूप में नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने वाले एक भावनात्मक सहारे के रूप में दिखाया है। सिर्फ यही नहीं, हिंदी फिल्मों ने रेडियो के इस असर को कई यादगार किरदारों के ज़रिये भी दिखाया है। 

सलाम नमस्ते (2005) में प्रीति ज़िंटा ने रेडियो जॉकी अम्बर "एम्बी" मल्होत्रा का किरदार निभाया था। यह किरदार आत्मनिर्भर, बेबाक और मॉडर्न था। उस समय जब एफएम रेडियो युवाओं में लोकप्रिय हो रहा था, एम्बी ने दिखाया कि आरजे सिर्फ़ गाने नहीं बजाते, बल्कि श्रोताओं के दोस्त भी होते हैं। 

लगे रहो मुन्नाभाई (2006) में विद्या बालन यानी जान्हवी एक रेडियो शो होस्ट थीं, जो अपने शो के ज़रिये गांधीजी के विचार आम लोगों तक पहुँचाती हैं। इस फिल्म ने दिखाया था कि रेडियो कैसे समाज में सकारात्मक सोच और बदलाव ला सकता है लगे रहो मुन्नाभाई (2006) में संजय दत्त का किरदार रेडियो जॉकी नहीं था, लेकिन रेडियो की भूमिका कहानी में बहुत अहम थी। रेडियो के ज़रिये 'गांधीगिरी' लोगों तक पहुँची और यह साबित हुआ कि यह माध्यम किसी की भी सोच को प्रभावित करने की ज़बरदस्त ताक़त रखता है। 

गुज़ारिश (2010) ऋतिक रोशन ने ईथन मैस्करेनहास का किरदार निभाया था, जो हादसे के बाद रेडियो जॉकी बन जाता है। उनका लेट-नाइट शो भावनाओं और शायरी से भरा होता है। यह किरदार दिखाता है कि रेडियो आवाज़ के ज़रिये दिलों से कैसे जुड़ता है। 

तुम्हारी सुलु (2017) में विद्या बालन एक साधारण गृहिणी सुलु के रूप में नज़र आती हैं, जो लेट-नाइट रेडियो जॉकी बन जाती है। उनका किरदार रेडियो की सादगी और अपनापन दिखाता है, जहाँ श्रोता खुलकर अपनी बातें साझा करते हैं। 

 

 

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