बोध कथा: परिवार ही जीवन की असली संपत्ति

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
On

शाम का समय था। पार्क में हल्की हवा चल रही थी और पेड़ों के बीच बैठने वाली बेंचों पर कुछ बुजुर्ग अपनी रोज़ की तरह गपशप में लगे थे। उन्हीं में से एक बेंच पर दो पुराने दोस्त बैठे थे। बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ तो पहला बुजुर्ग बोला, “मेरी एक पोती है, अब शादी के लायक हो गई है। उसने बी.ई. किया है, अच्छी नौकरी भी करती है। कद करीब पांच फुट दो इंच है और देखने में भी बहुत सुंदर है। अगर आपकी नजर में कोई अच्छा लड़का हो, तो बताइएगा।”

दूसरे बुजुर्ग ने मुस्कुराते हुए पूछा, “अच्छा !तो आपकी पोती को कैसा परिवार चाहिए?” पहले बुजुर्ग ने बिना सोचे जवाब देना शुरू किया, “बस कुछ खास नहीं, लड़का एम.ई. या एम.टेक किया हो। उसकी अच्छी नौकरी हो, सैलरी भी ठीक-ठाक हो- कम से कम एक लाख रुपये महीना। अपना घर हो, कार हो, घर में एसी हो और अगर छोटा-सा बाग-बगीचा भी हो तो और अच्छा।” दूसरे बुजुर्ग ने हल्के से सिर हिलाया और पूछा, “और कुछ?” पहला बुजुर्ग थोड़ा झुककर बोला, “हां, सबसे जरूरी बात, लड़का अकेला होना चाहिए। मां-बाप, भाई-बहन कोई न हो। दरअसल, इन सबके कारण घर में झगड़े होते हैं।” 

यह सुनकर दूसरे बुजुर्ग की आंखें अचानक नम हो गईं। उन्होंने धीरे से अपने आंसू पोंछे और भारी आवाज में बोले, “मेरे एक दोस्त का पोता है, बिल्कुल अकेला। उसके भाई-बहन नहीं हैं। मां-बाप भी एक हादसे में दुनिया छोड़ गए। अच्छी नौकरी है, डेढ़ लाख की सैलरी है, गाड़ी है, बंगला है सब कुछ है।”

पहला बुजुर्ग उत्साहित होकर बोला, “अरे वाह! फिर तो बात बन सकती है।” दूसरे बुजुर्ग ने गहरी सांस लेते हुए कहा, “हाँ! लेकिन उसकी भी एक शर्त है। वह चाहता है कि लड़की वालों के भी मां-बाप, भाई-बहन या कोई रिश्तेदार न हों।” पहला बुजुर्ग चौंक गया, “ये कैसी बकवास बात है? हमारा परिवार क्यों खत्म हो? कल को उसकी खुशियों या दुख में उसके साथ कौन होगा?”

दूसरे बुजुर्ग ने शांत लेकिन गहरी आवाज़ में कहा, “वाह मेरे दोस्त,अपने लिए परिवार जरूरी है, लेकिन दूसरे के लिए नहीं? अपने बच्चों को परिवार का महत्व समझाइए। घर के बड़े हों या छोटे, सभी जीवन की खुशियों और दुखों के सच्चे साथी होते हैं। बिना परिवार के इंसान के पास न खुशियां बांटने वाला होता है और न ही दुख में सहारा देने वाला।” पहला बुजुर्ग अब पूरी तरह चुप था। उसके चेहरे पर शर्म और समझ दोनों साफ दिखाई दे रहे थे। उस दिन पार्क की वह बातचीत एक गहरा संदेश छोड़ गई कि परिवार ही जीवन की असली संपत्ति है। अगर परिवार साथ है, तो हर खुशी दोगुनी लगती है और हर दुख आधा हो जाता है।