वर्ड स्मिथ: कैसे बना रेडियो शब्द

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Published By Anjali Singh
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रेडियो एक छोटा-सा शब्द है, पर अपने भीतर विज्ञान और संचार की लंबी यात्रा समेटे हुए। इस शब्द की जड़ें लैटिन भाषा के शब्द ‘रेडियस’ में मिलती हैं, जिसका अर्थ है किरण। 19 वीं सदी के उत्तरार्ध में जब वैज्ञानिक अदृश्य तरंगों की दुनिया को समझने की कोशिश कर रहे थे, तब इन तरंगों का व्यवहार प्रकाश की किरणों जैसा प्रतीत हुआ। यही कारण था कि इनके प्रसार को ‘किरणों’ की तरह समझा गया और धीरे-धीरे ‘रेडियो’ शब्द का प्रचलन शुरू हुआ। 

1880 के दशक में जर्मन भौतिक विज्ञानी हेनरिक हर्ट्ज़ ने यह सिद्ध कर दिया कि हवा में अदृश्य विद्युतचुंबकीय तरंगें फैल सकती हैं। इन्हीं तरंगों को आगे चलकर हर्ट्ज़ियन तरंगें या रेडियो तरंगें कहा गया। उस समय इनका उपयोग तार के बिना संदेश भेजने के लिए होने लगा, इसलिए आरंभ में इसे ‘वायरलेस’ अर्थात ताररहित संचार कहा जाता था। समय के साथ विज्ञान आगे बढ़ा और संचार की यह अदृश्य धारा दुनिया को जोड़ने लगी।

1906 में बर्लिन में आयोजित रेडियोटेलीग्राफिक सम्मेलन में ‘रेडियो’ शब्द को अंतर्राष्ट्रीय मान्यता मिली। फिर 1920 के दशक में जब आवाज और संगीत का प्रसारण शुरू हुआ, तब यह तकनीक केवल वैज्ञानिक प्रयोग नहीं रही, बल्कि जनजीवन का हिस्सा बन गई। धीरे-धीरे ‘वायरलेस’ शब्द पीछे छूट गया और ‘रेडियो’ लोगों की जुबान पर बस गया। एक ऐसी अदृश्य किरण, जो दूरियों को मिटाकर दुनिया को एक ही ध्वनि में जोड़ देती है।