हल्द्वानी: ‘एक हजार रुपये में पानी खरीदने को मजबूर हैं हम, अधिशासी अभियंता फोन तक नहीं उठाते’

हल्द्वानी: ‘एक हजार रुपये में पानी खरीदने को मजबूर हैं हम, अधिशासी अभियंता फोन तक नहीं उठाते’

हल्द्वानी, अमृत विचार। चंबल पुल से सटी निर्मल विहार, लक्ष्मी विहार, रतन पुरम, जीना कॉलोनी समेत कई कॉलोनियों में महीने भर से अधिक समय से पेयजल किल्लत बनी हुई है लेकिन विभागीय अधिकारी हैं कि शिकायत सुनने तक को तैयार नहीं हैं। आम लोगों की तो छोड़िए खुद पार्षद ने भी जल संस्थान के अधिशासी …

हल्द्वानी, अमृत विचार। चंबल पुल से सटी निर्मल विहार, लक्ष्मी विहार, रतन पुरम, जीना कॉलोनी समेत कई कॉलोनियों में महीने भर से अधिक समय से पेयजल किल्लत बनी हुई है लेकिन विभागीय अधिकारी हैं कि शिकायत सुनने तक को तैयार नहीं हैं। आम लोगों की तो छोड़िए खुद पार्षद ने भी जल संस्थान के अधिशासी अभियंता पर फोन रिसीव न करने का आरोप लगाया है। पार्षद गोपाल बिष्ट ने कहा कि जब तिकोनिया स्थित दफ्तर में जाते हैं तो वहां पता चलता है ईई मीटिंग में व्यस्त हैं और बाहर आकर जब फोन करते हैं तो ईई फोन तक नहीं उठाते। ऐसे में शिकायत करें तो करें किससे। यही वजह है कि लंबे समय से क्षेत्र की विभिन्न कॉलोनियों में पेयजल किल्लत बनी है।

सामाजिक कार्यकर्ता पंडित दिनेश चंद्र गुणवंत ने बताया कि पहले सिल्ट की सफाई रात के वक्त की जाती थी ताकि जनता को परेशानी न हो। अब विभागीय अधिकारी सुबह सुबह सिल्ट की सफाई के नाम पर सप्लाई बाधित कर रहे हैं। चंबल पुल के पास की कॉलोनियों में पेयजल सप्लाई को कोई समय निर्धारित नहीं है। वहीं कई जगह लीकेज से पानी बर्बाद हो रहा है।

शोभा गु‍णवंत और सुमन अधिकारी।

सुनिए लोगों की पीढ़ा

महीने भर से अधिक हो गया है, पानी नियमित नहीं आ रहा है। जिस कारण निजी टैंकर से पानी खरीदने को मजबूर हैं। आज ही एक हजार रुपये में प्राइवेट टैंकर से पानी भरवाया है। जल संस्थान के अधिकारी पूरी तरह से निरंकुश हो गए हैं। – शोभा गुणवंत, निर्मल विहार

पानी की नई लाइन से भी कुछ फायदा नहीं हुआ। जगह जगह लीकेज है। पर्याप्त पानी नहीं मिलने से रोजमर्रा के कार्यों में भी परेशानी होती है। निजी टैंकर से पानी खरीदने के सिवाय कोई विकल्प नहीं है। विभाग सिर्फ बिल भेजने तक ही सीमित है। – सुमन अधिकारी, रतनपुरम

कुछ समय पहले तक रात को सिल्ट की सफाई होती थी जिससे जनता परेशान ना हो लेकिन अब अधिकारियों को जनता की परवाह नहीं है। एक दिन छोड़कर पानी मिल रहा है, उसमें भी कोई समय तय नहीं है। कहें तो कहें किससे, ईई फोन तक नहीं उठाते हैं। – पंडित दिनेश चंद्र गुणवंत, समाजसेवी

मेरी समझ में नहीं आता कि पानी का बिल लगातार बढ़ रहा है लेकिन नलों से पानी गायब हो रहा है। जनता परेशान है लेकिन इसे देखने वाला कोई नहीं है। जल संस्थान के अधिकारी ऑफिस से निकलते तो पता चलता पानी के बगैर लोग कितने परेशान हैं। – जानकी तिवारी, लक्ष्मी विहार

समाजसेवी पंडित दिनेश चंद्र गुण‍वंत और जानकी तिवारी।

बोले जिम्मेदार

पहाड़ों में बारिश से गौला नदी में सिल्ट आ रही है। जिस वजह से पेयजल सप्लाई बाधित हुई है। अब मानसून की विदाई है। जल्द ही पेयजल व्यवस्था सुचारू हो जाएगी। कई बार मीटिंग और दफ्तर में जनता से घिरा होने की वजह से फोन उठाना संभव नहीं हो पाता है। लेकिन हमेशा फोन न उठाने की बात सही नहीं है। – संजय कुमार श्रीवास्तव, ईई, जल संस्थान

क्षेत्र की कॉलोनियों में लंबे समय से पेयजल समस्या बनी है। कई जगह लीकेज से पानी बर्बाद भी हो रहा है। जब भी शिकायत के लिए ईई को फोन करते हैं तो वह रिसीव ही नहीं करते। जनप्रतिनिधि होने के नाते जनता की परेशानी को उठाना मेरा काम है। अगर अधिकारियों की कार्यशैली नहीं सुधरी तो आंदोलन को मजबूर होंगे। – गोपाल बिष्ट, पार्षद

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