Uttarakhand News: मानसखंड की झांकी को देश में मिला पहला स्थान, CM धामी ने प्रदेशवासियों को दी बधाई

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Edited By Amrit Vichar
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देहरादून, अमृत विचार। गणतंत्र दिवस के मौके पर इस बार कर्तव्य पथ पर उत्तराखंड की झांकी बेहद खास रही। मानसखंड थीम पर आधारित उत्तराखंड की झांकी ने देश मे प्रथम स्थान प्राप्त  किया है। झांकी के पहले स्थान पर आने से उत्तराखंड का नाम इतिहास में दर्ज हो गया। 

सीएम ने प्रदेशवासियों को दी बधाई 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि के लिए प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि हम सबके लिए गौरवशाली पल है। पुराणों में गढ़वाल का केदारखंड और कुमाऊं का मानसखंड के रूप में वर्णन किया गया है। स्कंदपुराण में मानसखंड के बारे में बताया गया है। जागेश्वर मंदिर की बहुत धार्मिक मान्यता है।

पीएम मोदी ने सांस्कृतिक विरासत पर किया गर्व 

पीएम मोदी ने हमेशा अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने की बात कही है। मानसखंड मंदिर माला मिशन योजना भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मानसखण्ड मंदिर माला मिशन के तहत चार धाम की तर्ज पर कुमाऊं क्षेत्र के पौराणिक मंदिरों को भी विकसित किया जा रहा है।  

आखिर क्यों थी खास? 

उत्तराखंड का प्रसिद्ध कॉर्बेट नेशनल पार्क, बारहसिंगा, उत्तराखंड का राज्य पशु कस्तूरी मृग, गोरल, देश का राष्ट्रीय पक्षी मोर जो उधमसिंह नगर में पाया जाता है, उत्तराखंड के प्रसिद्ध पक्षी घुघुती, तीतर, चकोर, मोनाल आदि व उत्तराखंड की प्रसिद्ध ऐपण कला को प्रदर्शित किया गया था। झांकी के आगे और पीछे उत्तराखंड का नाम भी ऐपण कला से लिखा गया था। जागेश्वर धाम का मंदिर घनघोर देवदार के वृक्षों के बीच में है। इसलिए झांकी में मंदिर के आगे और पीछे घनघोर देवदार के वृक्षो का सीन तैयार किया गया था।

क्या हैं ऐपण ?

ऐपण कुमाऊं की समृद्ध और गरिमापूर्ण परंपरा है। इसे गेरू (लाल मिट्टी जो पानी के घोल से तैयार किया जाता है) पर बिस्वार (चावल के आटे का घोल) से अलग-अलग बेलें और चौकियां बनाई जाती हैं। धार्मिक अनुष्ठानों, नामकरण संस्कार, विवाह, जनेऊ आदि जैसे समारोहों की शुरुआत ऐपण बनाने से की जाती है। यह माना जाता है कि ऐपण सकारात्मकता और समृद्धि लाता है।

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