किसानों की आत्महत्या

किसानों की आत्महत्या

सरकार की कोशिशों और दावों के बावजूद किसानों की आत्महत्या का सिलसिला रुक नहीं रहा है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की एक रिपोर्ट के अनुसार आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या बढ़ रही है। 2021 में कृषि क्षेत्र से जुड़े 10,881 लोगों ने आत्महत्या की।

देश में औसतन हर रोज 30 किसान व खेतिहर मजदूर (कृषि श्रमिक) आत्महत्या कर रहे हैं, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक हैं। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 4,064 आत्महत्याएं दर्ज की गईं, उसके बाद कर्नाटक (2,169) और मध्य प्रदेश (671) का नंबर आता है। पंजाब में 270 कृषि संबंधी मौतें इस वर्ष देखी गईं। जबकि हरियाणा में 226, राजस्थान में 141 और हिमाचल प्रदेश में 24 मौतेें हुई।

2020 की तुलना में 2021 में नौ राज्यों में आत्महत्या में वृद्धि देखी गई। अकेले असम में लगभग 13 गुना वृद्धि देखी गई। सवाल है कि सरकारी दावों के मुताबिक यदि किसान की हालत में सुधार हुआ है तो वे आत्महत्या क्यों कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने किसानों को विश्वास में लेने के लिए आय को दुगनी करने का वायदा किया था, उसका क्या हुआ? नि:संदेह खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है।

किसानों को आत्महत्या की दशा तक पहुंचा देने के मुख्य कारणों में खेती का आर्थिक दृष्टि से नुकसान दायक होना है।  किसान घाटे को पूरा करने के लिए अकसर ऋण लेते हैं और फिर कर्ज के जाल में फंसकर रह जाते हैं। बिचौलियों से मिले अपमान व हताशा के बीच उन्हें आत्महत्या ही वैकल्पिक रास्ता लगता है। ऐसे में देश की प्रगति और विकास के तमाम दावे बेमानी साबित हो रहे हैं।

सरकारों की सारी उपलब्धियां अर्थहीन हैं। जलवायु परिवर्तन से मौसम में बदलाव की वजह से भी उपज प्रभावित होती है और किसान को नुकसान उठाना पड़ता है। साथ ही बंपर फसल होने पर उसे बाजार में उचित दाम नहीं मिलता। इससे उबरने के लिए किसानों की हर स्तर पर मदद की जानी चाहिए।

कुछ ऐसे प्रयास हों जिससे किसानों का मनोबल ऊंचा हो। साथ ही मौसम के अतिरेक से फसलों को बचाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए फसलों का विविधीकरण करने की जरूरत है। फसलों की सिंचाई के लिए किसानों को मुफ्त बिजली व पानी नहीं,बल्कि बिजली की निर्बाध आपूर्ति चाहिए।

किसान की आय बढ़ाने के लिए सरकारों ने जिन नीतियों की घोषणा की थी, उनका जमीनी स्तर पर मूल्यांकन किया जाना चाहिए कि वास्तव में उसका लाभ किसानों को क्यों नहीं मिल रहा है? सरकारों को किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए युद्धस्तर पर प्रयत्न करने की आवश्यकता है।

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