कानपुर : किडनी ट्रांसप्लांट के लिए GSVSS PGI का इंफ्रास्ट्रेक्चर बेहतर, शासन स्तर की टीम ने किया निरीक्षण
कानपुर अमृत विचार। कानपुर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के हैलट अस्पताल और जीएसवीएसएस पीजीआई में ऐसे कई मरीज आते हैं, जिनको ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है, लेकिन शहर के सरकारी संस्थानों में इसकी सुविधा नहीं होने पर मरीजों को लखनऊ, दिल्ली मुंबई या चेन्नई समेत आदि जगह जाना पड़ता है।
किडनी ट्रांसप्लांट जीएसवीएसएस पीजीआई में ही हो सके, इसके लिए शासन स्तर से गठित तीन सदस्यीय टीम ने यहां पर निरीक्षण किया, कागजात देखे और तैयारियों पर प्राचार्य प्रो. संजय काला से जानकारी ली। साथ ही टीम ने कुछ सुझाव भी दिए।
जीएसवीएसएस पीजीआई में शुक्रवार को शासन से गठित टीम में शामिल केजीएमयू से डॉ.अभिनव अरुण सोनकर, एसजीपीजीआई से डॉ. नारायण प्रसाद और डॉ. आरएमएलआईएमएस से डॉ.ईश्वर राम दयाल पहुंचे, यहां पर टीम ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो.संजय काला, उप प्राचार्य प्रो.रिचा गिरी, हैलट के प्रमुख अधीक्षक डॉ.आरके सिंह और सीएमएस डॉ.सौरभ अग्रवाल के साथ निरीक्षण किया।
टीम ने नेफ्रोलॉजी विभाग और यूरोलॉजी विभाग में प्रतिदिन आने वाले मरीजों की जानकारी ली। जानकारी हुई कि पीजीआई में न सिर्फ कानपुर, बल्कि आसपास के करीब 17 से 18 जिलों से मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिनमे से कई मरीज ऐसे शामिल होते हैं, जिनको किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है।
टीम ने यहां पर किडनी ट्रांसप्लांट से संबंधित जरूरतों को समझा। आईसीयू व ऑपरेशन थिएटर में मौजूद व्यवस्थाओं और उपकरणों को परखा। इसके बाद किडनी ट्रांसप्लांट को लेकर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा क्या तैयारियां की जा रही हैं, इसपर मुख्य फोकस किया। साथ ही ट्रांसप्लांट सेंटर के लिए बेसिक जरूरतों को देखा।
टीम के मुताबिक यहां पर किडनी ट्रांसप्लांट शुरू होने से लखनऊ पर भार कम हो जाएगा। मरीजों को भी राहत मिलेगी। किडनी ट्रांसप्लांट सेंटर के लिए यहां का इंफ्रास्ट्रेक्चर सही है। वहीं, कुछ सुझाव भी दिए गए है, ताकि भविष्य में उसका लाभ मरीजों को हो सके। रिपोर्ट तैयार कर शासन में भेजी जाएगी, उसके बाद शासन स्तर से सेंटर के संचालन की कार्रवाई होगी।
