Bareilly : यूजीसी बिल के विरोध में अलंकार समर्थकों ने शुरू किया धरना

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। यूजीसी बिल वापस लेने और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई मारपीट के विरोध में गणतंत्र दिवस के अवसर पर सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने के बाद अलंकार अग्निहोत्री ब्राह्मण समाज के नेता बन गए हैं। जिला प्रशासन ने बुधवार की दोपहर उन्हें बरेली से बाहर भेज दिया। इस कार्रवाई से ब्राह्मण समाज में जबरदस्त आक्रोश है। बड़ी संख्या में लोगों ने दोपहर करीब 3 बजे सेठ दामोदर स्वरूप पार्क में धरना प्रदर्शन की रणनीति बनाते हुए अलंकार की अलख को तेज करने का निर्णय लिया।

बरेली पुनरुत्थान समिति के वरिष्ठ नेताओं ने एकजुटता का परिचय देते हुए पार्क में बड़ा टेंट लगवाया है, सर्दी से बचाव के लिए रजाई, गद्दे व तखत का इंतजाम किया है। लोगों ने कहा कि यूजीसी बिल के विरोध में तब तक धरना प्रदर्शन चलेगा जब तक यूजीसी बिल वापस नहीं हो जाता है। रणनीति यह बनायी गयी है कि सुबह से शाम तक और रात में कुछ संगठनों के लोग धरने पर बैठेंगे ताकि किसी का कार्य भी प्रभावित नहीं हो। यूजीसी के विरुद्ध आवाज उठाने में बड़ी संख्या में अधिवक्ता वर्ग का भी सपोर्ट मिला है। कांग्रेस के जिला प्रवक्ता राज शर्मा, सपा नेता समर्थ मिश्रा और अविनाश मिश्रा, पंकज पाठक सहित राजन उपाध्याय आदि ने समर्थन किया है।

अलंकार अग्निहोत्री को बुधवार दोपहर कड़ी सुरक्षा में समाज के लोगों से बिना मिलाए लखनऊ ले जाया जा रहा था तब बड़ी संख्या में लोगों ने विरोध जताते हुए उन्हें रोकने का प्रयास किया था। जब प्रयास सफल नहीं हुआ तब लोगों ने अलंकार अग्निहोत्री की अलख को तेज करते हुए धरना प्रदर्शन जोरशोर से करने की रणनीति बनायी। वहीं कांग्रेस, सपा, भाजपा से जुड़े ब्राह्मण समाज के लोगों ने यूजीसी का खुलकर विरोध शुरू किया है। इधर बुधवार की रात में बड़ी संख्या में लोग धरने पर बैठे रहे। पार्क में पुलिस बल भी तैनात किया गया है।
अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद के पदाधिकारी पहुंचे

बरेली : यूजीसी काले कानून के विरोध में अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद के बरेली, पीलीभीत सहित कई शहरों के प्रतिनिधि बुधवार को सेठ दामोदर स्वरूप पार्क में जुटे। सिटी मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री को समर्थन दिया, पदाधिकारियों ने कहा है कि अगर यही कार्यक्रम चलता रहा तो धीरे-धीरे पदाधिकारियों के इस्तीफे आने शुरू हो जाएंगे। बीजेपी का बहिष्कार करेंगे, जब तक काले कानून को वापस नहीं लिया जाएगा, हम लोग धरना-प्रदर्शन पर रहेंगे, एक दिन यह उग्र रूप ले लेगा जो सरकार के लिए दुखदाई हो जाएगा, इसलिए काले कानून को तत्काल वापस लेना चाहिए।

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