खोज: प्रिंटिंग मशीन की खोज

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Published By Anjali Singh
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जर्मनी के मेंज (माइंस) शहर में वर्ष 1398 में जन्मे योहानेस गटेनबर्ग ने मानव इतिहास की सबसे क्रांतिकारी खोजों में से एक प्रिंटिंग मशीन का आविष्कार किया। पंद्रहवीं सदी तक पुस्तकों की दुनिया पूरी तरह हाथ से लिखी गई पांडुलिपियों और लकड़ी के गुटकों से होने वाली छपाई पर निर्भर थी। यह प्रक्रिया न केवल अत्यंत धीमी थी, बल्कि महंगी और सीमित भी थी। गटेनबर्ग ने इसी जटिल और श्रमसाध्य व्यवस्था को बदलने की नींव रखी। वर्ष 1439 में गटेनबर्ग ने मूवेबल टाइप प्रिंटिंग मशीन का आविष्कार किया। यह तकनीक अपने समय से कहीं आगे थी, क्योंकि इसमें लकड़ी के अक्षरों के स्थान पर धातु (मेटल) से बने अलग-अलग अक्षरों का उपयोग किया गया था। 

इन अक्षरों को जरूरत के अनुसार बदला और दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता था। यही विशेषता इस मशीन को पहले की सभी छपाई तकनीकों से अलग और अधिक प्रभावशाली बनाती थी। गटेनबर्ग की प्रिंटिंग प्रेस की सबसे ऐतिहासिक उपलब्धि 1456 में सामने आई, जब जर्मनी के माइंस शहर में उनकी प्रेस से बाइबिल की पहली मुद्रित प्रति प्रकाशित हुई। इसे आज भी मुद्रण इतिहास की अमूल्य धरोहर माना जाता है। 

इस मशीन की एक बड़ी खासियत यह थी कि इससे किसी भी प्रकार के कागज पर साफ, स्पष्ट और तेज़ छपाई संभव हो सकी। जहां पहले की तकनीकों से दिनभर में केवल 40 से 50 पृष्ठ ही छप पाते थे, वहीं गटेनबर्ग की प्रिंटिंग मशीन से प्रतिदिन 1,000 से अधिक पृष्ठों की छपाई संभव हो गई। इस आविष्कार ने न केवल पुस्तकों को सस्ता और सुलभ बनाया, बल्कि ज्ञान, शिक्षा और विचारों के प्रसार को अभूतपूर्व गति दी।

इस प्रकार, योहानेस गटेनबर्ग का आविष्कार केवल एक मशीन नहीं था, बल्कि उसने पूरी दुनिया के सोचने, सीखने और संवाद करने के तरीके को हमेशा के लिए बदल दिया।यह आविष्कार केवल तकनीकी परिवर्तन नहीं था, बल्कि सामाजिक और बौद्धिक क्रांति की शुरुआत भी था। मुद्रण के कारण ज्ञान सस्ता हुआ, शिक्षा का प्रसार हुआ और विचारों का आदान-प्रदान तेज़ हुआ। इसी तकनीक ने आगे चलकर पुनर्जागरण, धार्मिक सुधार आंदोलन (Reformation) और वैज्ञानिक क्रांति को गति दी।

वैज्ञानिक के बारे में

योहानेस गटेनबर्ग को यूरोप के इतिहास में उस व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं, जिन्होंने ज्ञान की दुनिया को आम लोगों तक पहुंचाने का रास्ता खोला। वे जर्मनी के मेंज़ (Mainz) शहर में जन्मे थे और पेशे से सुनार, आविष्कारक और मुद्रक थे। गटेनबर्ग का सबसे बड़ा योगदान था चल अक्षरों (Movable Type) वाली मुद्रण मशीन का विकास, जिसने पुस्तकों के निर्माण की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया।

विडंबना यह रही कि गटेनबर्ग स्वयं अपने जीवन में आर्थिक रूप से सफल नहीं हो पाए। कर्ज और मुकदमों के कारण उन्हें अपनी छापाखाने की इकाई से हाथ धोना पड़ा। फिर भी इतिहास ने उन्हें वह सम्मान दिया, जिसके वे वास्तव में हकदार थे। आज योहानेस गटेनबर्ग को आधुनिक मुद्रण का जनक माना जाता है। उनका आविष्कार मानव सभ्यता के उन दुर्लभ मोड़ों में से एक है, जिसने सोचने, सीखने और दुनिया को समझने के तरीके को हमेशा के लिए बदल दिया।