30 साल बाद बना शुक्र और शनि का दुलर्भ संयोग
शनि-शुक्र का 30 साल बाद दुर्लभ संयोग मीन राशि में बना है, जिसने ज्योतिष जगत में मालव्य राजयोग का प्रारंभिक स्वरूप रचा है। यह योग स्थिरता के कारक शनि और सुख-वैभव के दाता शुक्र का अनुपम मेल है, जब शुक्र उदय अवस्था में अपनी उच्च राशि मीन की ओर अग्रसर होकर शनि से युति करेंगे। 28 जनवरी का अर्धकेंद्र योग (शनि मीन में, शुक्र मकर में) प्रारंभिक ऊर्जा का संकेत है, जो पूर्ण युति तक (मार्च तक) कार्य करता रहता है। शनि मीन में 29 मार्च 2025 से 3 जून 2027 तक रहेंगे, लेकिन शुक्र के साथ निकट युति केवल 2 मार्च से 26 मार्च तक चरम पर होगी। यह 30 वर्ष बाद का संयोग धन-प्रगति का लंबा प्रभाव छोड़ेगा।
योग का ज्योतिषीय महत्व
शनि-शुक्र युति मीन में कर्म और भोग का दुर्लभ संतुलन स्थापित करती है। शनि पहले से मीन में स्थित हैं, जबकि शुक्र 1 फरवरी के उदय से ठीक पहले 28 जनवरी को इस योग को सक्रिय किया। 28 जनवरी 2026 से बना शनि-शुक्र का दुर्लभ अर्धकेंद्र योग (45 डिग्री दूरी) मुख्य रूप से एक दिवसीय या अल्पकालिक प्रभाव वाला है, लेकिन इसका व्यापक फल मीन युति तक जारी रहेगा। वास्तविक शनि-शुक्र युति मीन राशि में 2 मार्च 2026 को सुबह लगभग 5 बजे बनेगी और लगभग 26 दिनों तक (26 मार्च 2026 तक) प्रभावी रहेगी।
हिंदू पंचांग के अनुसार, शुक्र का मीन गोचर 2 मार्च से शुरू होकर 28 मार्च के आसपास समाप्त होगा, जब शुक्र अगली राशि में प्रवेश करेंगे मीन जल राशि गुरु के अधीन होने से यह युति आध्यात्मिक ऊंचाइयों को भी छूएगी। पिछले 30 वर्षों में ऐसी युति दुर्लभ रही, जो जीवन के कठिन दौर को वैभवपूर्ण मोड़ देती है। वर्तमान गोचर चक्र में यह शनि की साढ़ेसाती और शुक्र की दशा प्रभावित राशियों के लिए वरदान सिद्ध होगा। वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व कोण की शुद्धि (जल स्रोत स्थापना) और फेंग-शुई में दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में गुलाबी क्रिस्टल रखने से ग्रह ऊर्जा का अधिकतम लाभ मिलेगा।
सभी राशियों पर विस्तृत प्रभाव
मेष राशि: 12 वें भाव में यह योग विदेश यात्रा, छिपे खर्चों पर नियंत्रण और आध्यात्मिक जागरण लाएगा। नौकरीपेशा लोगों को अप्रत्याशित लाभ, लेकिन जल्दबाजी से बचें। प्रेम संबंध गहराएंगे।
वृषभ राशि: 11वें भाव से मित्र मंडली और सामाजिक नेटवर्क से धन लाभ। विवाह योग प्रबल, व्यापारिक साझेदारी मजबूत होगी। सौंदर्य और विलासिता पर निवेश फलदायी।
मिथुन राशि: 10वें भाव में करियर का स्वर्णिम काल, प्रमोशन, नई जिम्मेदारियां। रचनात्मक क्षेत्रों में मान-सम्मान, प्रेमी से स्थायी बंधन की संभावना।
कर्क राशि: भाग्य स्थान (9वें भाव) सक्रिय, उच्च शिक्षा, धार्मिक यात्रा या पिता से सहयोग। कानूनी मामलों में विजय, धन संचय में वृद्धि।
सिंह राशि: 8वें भाव से विरासत, बीमा या रहस्यमय लाभ। वैवाहिक जीवन में मधुरता, स्वास्थ्य में सुधार लेकिन नियमित जांच जरूरी। आध्यात्मिक साधना फलेगी।
कन्या राशि: 7वें भाव में साझेदारी मजबूत, व्यापार वृद्धि। नीच प्रभाव कम होकर वैवाहिक सुख बढ़ेगा, लेकिन निर्णय सावधानी से लें।
तुला राशि: 6वें भाव से शत्रु पर विजय, स्वास्थ्य उन्नति और नौकरी में स्थिरता। विवाद सुलझेंगे, ऋण मुक्ति के योग।
वृश्चिक राशि: 5वें भाव में संतान सुख, रोमांस चरम पर। रचनात्मकता, शिक्षा और निवेश में सफलता, कलात्मक क्षेत्र चमकेंगे।
धनु राशि: 4वें भाव से घर-सुख, वाहन खरीद और माता से लाभ। संपत्ति सौदे आदर्श, पारिवारिक शांति स्थापित होगी।
मकर राशि: 3वें भाव में साहस वृद्धि, भाई-बहन सहयोग। संचार, लेखन या मीडिया क्षेत्र में प्रगति, छोटी यात्राएं सुखद।
कुंभ राशि: 2वें भाव से धन वर्षा, वाणी शक्ति प्रभावी। पारिवारिक सुख, बचत में इजाफा और स्वादिष्ट भोजन का आनंद।
मीन राशि: लग्न में योग व्यक्तित्व को चुम्बकीय बनाएगा। विवाह, करियर और स्वास्थ्य में चरम सफलता यह आपका स्वर्णिम समय है। आचार्य मधुरेंद्र पाण्डे, ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ
