यूपी बजट सत्र : विधानसभा में आरक्षण पर टकराव, सत्तापक्ष-विपक्ष में तीखी बहस के बीच बढ़ा विवाद, स्पीकर ने जताई नाराजगी

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में बुधवार को राज्य स्तरीय भर्तियों में आरक्षण के मुद्दे पर तीखी बहस के बाद सदन में हंगामा खड़ा हो गया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि अध्यक्ष को कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। प्रश्नकाल के दौरान समाजवादी पार्टी की विधायक रागिनी सोनकर ने सरकारी भर्तियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित आरक्षण के अनुपालन को लेकर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण नीति के क्रियान्वयन को लेकर कई स्तरों पर अस्पष्टता है। 

इस पर संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने सदन को अवगत कराया कि अप्रैल 2017 से अब तक 47 हजार पदों पर नियुक्तियां की गई हैं। उनके अनुसार, इनमें 18 हजार सामान्य वर्ग, 2,081 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस), 9,580 अनुसूचित जाति, 447 अनुसूचित जनजाति तथा 17,295 अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थी शामिल हैं। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विधायक ने पूरक प्रश्न के जरिए आरक्षण के प्रतिशत और उसके अनुपालन को लेकर पुनः स्पष्टीकरण मांगा। इस दौरान सत्ता पक्ष के कुछ सदस्य भी अपनी बात रखने के लिए खड़े हो गए, जिससे सदन में शोर-शराबा बढ़ गया। 

सत्तापक्ष के सदस्यों पर सतीश महाना ने जताई नाराजगी

हालात बिगड़ते देख अध्यक्ष सतीश महाना ने व्यवस्था बनाए रखने की अपील की और सत्तापक्ष के सदस्यों पर नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब विपक्ष को बोलने का अवसर दिया जा रहा है तो व्यवधान उचित नहीं है। लगातार व्यवधान के चलते अध्यक्ष ने असंतोष प्रकट करते हुए कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी। निर्धारित समय के बाद सदन की कार्यवाही पुनः आरंभ हुई और आगे का कामकाज सामान्य रूप से संचालित किया गया। विधानसभा में सपा विधायक संग्राम सिंह यादव ने आजमगढ़ राजकीय मेडिकल कॉलेज से जुड़े 100 से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों को हटाए जाने का मुद्दा उठाया।

उन्होंने पूछा कि वर्षों से कार्यरत संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित क्यों नहीं किया जा रहा है। जवाब में श्रम मंत्री अनिल राजभर ने स्पष्ट किया कि राज्य में आउटसोर्स कर्मचारियों का नियमितीकरण संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा के लिए अलग निगम का गठन किया गया है, जिससे किसी भी प्रकार की मनमानी रोकी जा सके। इस दौरान विपक्ष के सदस्यों ने आरोप लगाया कि कंपनियों के माध्यम से वेतन वितरण में पारदर्शिता की कमी है और ईपीएफ कटौती के बावजूद राशि कर्मचारियों के खातों में जमा नहीं हो रही। 

सरकार ने आश्वासन दिया कि यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है तो कार्रवाई की जाएगी। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने 16 वर्ष के किशोरों को 50 सीसी तक के वाहन चलाने हेतु लाइसेंस देने के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर बताया कि इस विषय में केंद्र सरकार से अनुमति का अनुरोध किया गया है। उन्होंने कहा कि कुछ इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में उपलब्ध हैं और अनुमति मिलने पर नियमों के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा।

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