Bareilly : वसीम बरेलवी ने श्रेष्ठ शायरी से बरेली को दिलाई अंतरराष्ट्रीय पहचान

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Published By Pradeep Kumar
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बरेली, अमृत विचार। शायर वसीम बरेलवी की ''शख्सियत और शायरी'' पर मानव सेवा क्लब के तत्वावधान में गुरुवार की देर शाम फूटा दरवाजा स्थित उनके आवास पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। साहित्यकारों और विद्वानों ने विचार व्यक्त किए।

क्लब अध्यक्ष सुरेन्द्र बीनू सिन्हा ने कहा, वसीम बरेलवी ने अपनी श्रेष्ठ शायरी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बरेली पहचान दिलाई, जो आज तक कोई नहीं कर पाया। लेखक रणजीत पांचाले ने कहा कि आज कम लोगों को पता है कि वसीम बरेलवी ने अनेक सुंदर गीतों की भी रचना की है। उनके गीतों के भाषाई सौंदर्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। गीतकार रमेश गौतम ने कहा कि वसीम बरेलवी की शायरी ने देश की सांस्कृतिक धरोहर को बड़ी संजीदगी से संभाला है। साहित्य भूषण सुरेश बाबू मिश्रा ने कहा, वसीम साहब के उच्चस्तरीय सृजन ने उर्दू शायरी की लोकप्रियता की वृद्धि में विशेष योगदान दिया है। इस अवसर पर वसीम बरेलवी ने अपनी यह नई गजल पढ़ी: चर्चे हमारे फन के कहां पर नहीं हुए, लेकिन कभी हम आपे से बाहर नहीं हुए, अपनी जमीं को हमने बनाया है आसमां, ऊंचे किसी के कांधे पर चढ़कर नहीं हुए, उड़ने का एक जुनूं था कि मरहम बन रहा, पथराव कब हमारे परों पर नहीं हुए। श्रेष्ठ शायरी पर उन्हें पगड़ी और शाल पहनाकर सम्मानित किया। इन्द्र देव त्रिवेदी, प्रकाश चंद्र सक्सेना, प्रदीप माधवार, निर्भय सक्सेना, राम कुमार, सुधीर मोहन ने भी विचार व्यक्त किए।

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