कचहरी को 18 बमों से उड़ाने की धमकी से मचा हड़कंप, जिला जज की आधिकारिक वेबसाइट पर आया ईमेल... पहले भी सुरक्षा व्यवस्था की उड़ चुकी हैं धज्जियां

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Published By Muskan Dixit
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बीडीएस टीम ने की अदालत और अधिवक्ता चैंबरों तथा बैठने के स्थान की सघन जांच, पूरी कचहरी छावनी में तब्दील

अयोध्या, अमृत विचार : जिला जज की आधिकारिक वेबसाइट पर भेजी गई ईमेल से कचहरी को 18 बमों से उड़ाने की धमकी दी गई। ईमेल मिलते ही शुक्रवार दोपहर न्याय प्रशासन, जिला व पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया। पुलिस ने आठ मंजिला बिल्डिंग की अदालतों से अधिवक्ताओं, जजों और वादकारियों को बाहर निकाला। बीडीएस की टीम ने सभी अधिवक्ता चैंबरों समेत पूरे परिसर को गहनता से खंगाला। जांच में कुछ न मिलने व धमकी का निर्धारित समयावधि बीतने के बाद न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता व पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली।

रोज की तरह अधिवक्ता शुक्रवार को जिरह में व्यस्त थे। टाइपिस्ट मुकदमें के मजमून टाइप कर रहे थे। न्यायिक अधिकारी कोर्ट का काम देख रहे थे। वादकारी अपने मुकदमों की पुकार सुन रहे थे। इसी बीच दोपहर लगभग 12:55 बजे जिला जज रणंजय कुमार वर्मा की आधिकारिक वेबसाइट पर एक ईमेल आई। यह ईमेल किसी एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड की ओर से भेजा जाना बताया गया। इसमें कहा गया था कि दिन में 1:30 बजे पूरी अयोध्या कचहरी को 18 बमों से उड़ा दिया जाएगा। बताया जाता है कि इसी तरह का ईमेल प्रदेश की अन्य कचहरियों में भी आया था। जिला जज रणंजय कुमार वर्मा ने इसकी सूचना बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र व पुलिस व जिला प्रशासन को दी। एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी, सीओ सिटी श्रीयश त्रिपाठी बम डिस्पोजल स्कवॉयड, डॉग स्कवॉयड व भारी पुलिस बल के साथ कचहरी पहुंचे और अदालतों में मौजूद अधिकारियों और अधिवक्ताओं को बाहर निकाला। सभी अधिवक्ताओं को भी उनके चैंबरों व बैठने के स्थान बाहर करवा दिया गया। कचहरी में लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। कचहरी से अधिवक्ताओं और वादकारियों को निकालने के लिए अधिवक्ता संघ से अनाउंसमेंट भी किया। इसके बाद जांच दल ने पूरी कचहरी परिसर, कमिश्नरी और कलेक्ट्रेट, न्यायिक अधिकारियों के चेंबर तथा अदालतों की सघन जांच की। बम विस्फोट के निर्धारित समय अवधि के पहले ही समस्त जांच पूरी कर ली गई, कहीं कोई आपत्तिजनक वस्तु नहीं मिली, तब अधिकारियों ने राहत की सास ली।

कचहरी की सुरक्षा व्यवस्था पर किया विचार विमर्श

कचहरी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला जज और सीजेएम सुधांशु शेखर उपाध्याय के विश्राम कक्ष में बैठक भी हुई। जिसमें कचहरी की सुरक्षा व्यवस्था और पुख्ता करने पर विचार-विमर्श हुआ। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र ने बताया कि वह कमिश्नरी में बहस कर रहे थे, 1:05 पर जिला जज रणंजय कुमार वर्मा ने उन्हें मोबाइल से सूचित किया। वह जिला जज के चेंबर में पहुंचे जिला जज में उन्हें ईमेल से मिली धमकी के बारे में बताया। आवश्यक विचार विमर्श के बाद पूरी कचहरी में सघन जांच की गई। बताया कि 18 जिले में कचहरियों में बम विस्फोट की धमकी दी गई थी। अयोध्या में 18 बम से विस्फोट करने की धमकी थी। ईमेल में बम विस्फोट का समय 1:30 बजे था। इसके पहले ही पूरी कचहरी, अधिवक्ताओं के बैठने के चेंबर उनके तख्ते और सभी अदालतों की जांच पूरी कर ली गई लेकिन कोई आपत्तिजनक वस्तु नहीं बरामद हुई। बताया कि बेंच तथा प्रशासनिक अधिकारियों से कचहरी की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में अलग से वार्ता की जाएगी।

सीओ सिटी श्रीयश त्रिपाठी ने बताया कि सूचना मिलने पर कचहरी परिसर को खाली कराकर बीडीएस व एटीएस की टीम ने सघन तलाशी ली गई। कही कुछ नहीं मिला। कचहरी परिसर के सुरक्षा के इंतजामों की समीक्षा की जा रही है।

पहले भी तार तार हुई है कचहरी की सुरक्षा व्यवस्था

-23 नवंबर 2006 को हुआ था सीरियल ब्लास्ट, चार ने गंवाई थी जान

घटना हुई सुरक्षा का ताना बाना बुना गया। कुछ दिन सुरक्षा सख्त रही उसके बाद ढील दे दी गई। इस घटना के पहले भी कचहरी की सुरक्षा तार-तार हुई है। जहां सिलसिले बार बम धमाकों में चार लोगों की जान चली गई थी।

23 नवंबर 2006 में कचहरी में शेड नंबर 6 और 20 में सिलसिले वार बम धमाके में अधिवक्ता राधिका प्रसाद मिश्रा, स्टांप वेंडर ओम प्रकाश तथा एक वादकारी की मौत हो गई थी। दर्जनों लोग घायल हुए थे। इस घटना में नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी, एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉयड और पुलिस के संयुक्त अभियान में सात आरोपी प्रकाश में आए थे। जिसमे सुनवाई के बाद अपर जिला जज अशोक कुमार ने सज्जादुररहमान को कोर्ट ने दोष मुक्त कर दिया था। मोहम्मद अख्तर उर्फ तारिक व तारिक कासमी को आजीवन कारावास की सजा हुई थी। आरोपी खालिद मुजाहिद पेशी से ले जाते वक्त बाराबंकी में मौत हो गई थी। घटना का मुख्य सूत्रधार पुलिस की पकड़ में आने के पहले ही मर गय जबकि दो के खिलाफ आज भी विवेचना प्रचलित है।

गेट नंबर एक पर हुआ था गैंगवार

कचहरी परिसर में वीआईपी गेट माने जाने वाले गेट संख्या एक के सामने वर्ष 2014 में गैंगवार हुआ था। इसकी रिपोर्ट सुल्तानपुर जिले के यशभद्र सिंह उर्फ मोनू ने दर्ज कराई थी, घटना में वह भी घायल हुए थे। इसमें साधु वेशधारी साहिल की मौत हो गई थी। आरोपी जैनेंद्र शर्मा गिरफ्तार हुआ था। इस घटना के आरोपी रहे विधायक विनोद सिंह को हाईकोर्ट से राहत मिल गई थी जबकि कमला देवी का मामला विचाराधीन है। जैनेंद्र शर्मा को विचारण के बाद पूर्व अपर जिला जज अशोक कुमार दुबे की अदालत से सजा सुनाई जा चुकी है।

गैंगस्टर जज पर हुआ था सुतली बम से हमला

गैंगस्टर जज रहे विनोद कुमार मिश्रा पर कोर्ट में ही बम से हमला हुआ था। विचाराधीन बंदी त्रिजुग नारायण तिवारी ने उनके कोर्ट में ही सुनवाई के दौरान सुतली बम से हमला किया था। हालांकि उसमें विस्फोट नहीं हुआ और जज साहब की जान बच गई। मामले में विचारण के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज रविंद्र विक्रम सिंह ने त्रिजुग नारायण तिवारी को सात साल के कारावास की सजा से दंडित किया था।

सितंबर 2025 में मिला था तमंचा व कारतूस

कचहरी परिसर के शेड नंबर 5 में 6 सितंबर 2025 को एक लावारिस बैग से दो देसी तमंचे और चार कारतूस बरामद होने से हड़कंप मच गया था। यह घटना कड़ी सुरक्षा के बावजूद सामने आई, जिससे एक बार फिर कचहरी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे। आज तक बैग रखने वाले आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर हैं।

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