तीन माह में शुरू होगा मेट्रो का काम, टेंडर प्रक्रिया तेज... हाइटेक सुविधाओं से लैस होंगे एलिवेटेड स्टेशन
लखनऊ, अमृत विचारः ईस्ट–वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया तेज हो गई है। सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो करीब तीन महीने बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। परियोजना का संचालन कर रही उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) के जन संपर्क अधिकारी पंचानन मिश्रा ने बताया कि एक टेंडर अभी बंद हुआ है और नया टेंडर जारी होने में लगभग डेढ़ महीना लगेगा। टेंडर फाइनल होते ही चयनित कंपनी अपने इंजीनियरों और कर्मचारियों के साथ साइट पर काम शुरू कर देगी।
जन संपर्क अधिकारी ने बताया कि अभी लगभग 10 से 12 और टेंडर जारी होने हैं। जिनमें सिविल वर्क (सरिया, मौरंग, बेस निर्माण), ट्रेन सप्लाई, पटरी बिछाने का काम, बिजली व्यवस्था, स्टेशन सफाई व क्लीनिंग आदि शामिल है। निर्माण की शुरुआत सिविल स्ट्रक्चर से होगी। स्टेशन तैयार होने के बाद क्लीनिंग और मेंटेनेंस से जुड़े अलग टेंडर जारी किए जाएंगे। चारबाग से वसंतकुंज तक 12 किमी आधुनिक कॉरिडोर में सात भूमिगत स्टेशन और पांच एलिवेटेड स्टेशन होंगे। कॉरिडोर के एलिवेटेड स्टेशनों को हरियाली से सजाया जाएगा।
डिपो में हाईटेक जल प्रबंधन और जीरो डिस्चार्ज
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए डिपो में अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। जिसमें जीरो डिस्चार्ज सिस्टम( डिपो से बाहर गंदा पानी नहीं जाएगा)। ड्यूल प्लंबिंग सिस्टम- ताजे और रीसाइकल पानी के लिए अलग पाइपलाइन। एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट)- वॉशरूम, किचन और सफाई के पानी का शोधन। ईटीपी (एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट)- ट्रेन वॉशिंग व मेंटेनेंस के पानी का उपचार। संयुक्त एसटीपी-ईटीपी यूनिट-कम जमीन और ऊर्जा में अधिक दक्षता, पानी का पुनः उपयोग। व्यापक जल भंडारण व्यवस्था- ट्रांसपोर्ट नगर डिपो की तर्ज पर आधुनिक सिस्टम।
यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने कहा कि ईस्ट–वेस्ट कॉरिडोर न केवल ट्रैफिक जाम से राहत देगा, बल्कि लखनऊ को एक ग्रीन, आधुनिक और स्मार्ट सिटी के रूप में नई पहचान भी देगा। आने वाले वर्षों में यह परियोजना शहर की जीवनरेखा साबित होगी।
