खाद्य कारोबारियों के लिए खुशखबरीः FSSAI ने बदले नियम, अब हर साल नवीनीकरण का झंझट खत्म, जानें पूरी details
छोटे खाद्य कारोबारियों को बड़ी राहत, एक अप्रैल से लागू होंगे नए प्रावधान
लखनऊ, अमृत विचार: खाद्य कारोबारियों, स्ट्रीट फूड विक्रेताओं और छोटे व्यापारियों को राहत देते हुए खाद्य लाइसेंस और पंजीकरण के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। नए प्रावधानों के तहत अब हर साल खाद्य लाइसेंस का नवीनीकरण कराना अनिवार्य नहीं होगा। नियमों का गजट प्रकाशन हो चुका है और इन्हें एक अप्रैल से लागू किया जाएगा।
नए नियमों के अनुसार, नगर निगम या स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण एवं पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 के तहत पंजीकृत ठेले-खोमचे और फेरीवाले स्वतः ही एफएसएसएआई में पंजीकृत माने जाएंगे। इससे छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को दोबारा पंजीकरण कराने और लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि सभी खाद्य कारोबारियों के लिए स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मानकों का पालन करना अनिवार्य रहेगा।
नए प्रावधानों के तहत छोटे खुदरा विक्रेता, स्ट्रीट फूड विक्रेता, अस्थायी स्टॉल संचालक, फूड ट्रक संचालक और कुटीर स्तर के खाद्य उद्योग भी इस व्यवस्था में शामिल होंगे। जरूरी दस्तावेज पूरे होने पर अब पंजीकरण प्रमाणपत्र तुरंत जारी किया जा सकेगा। यदि कोई कारोबारी वार्षिक शुल्क या खाद्य सुरक्षा अनुपालन से जुड़ा रिटर्न जमा नहीं करता है तो उसका लाइसेंस या पंजीकरण स्वतः निलंबित माना जाएगा। इसके अलावा खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण अब जोखिम आधारित प्रणाली के तहत किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर थर्ड पार्टी से फूड सेफ्टी ऑडिट भी कराया जा सकेगा। पहले 12 लाख रुपये सालाना टर्नओवर तक के कारोबारियों को पंजीकरण मिलता था, जिसे बढ़ाकर अब 1.5 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसी तरह पहले 5 करोड़ रुपये तक के कारोबारियों को राज्य स्तर से लाइसेंस मिलता था और इससे अधिक टर्नओवर पर केंद्र से लाइसेंस लेना पड़ता था। अब यह सीमा बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये कर दी गई है। जिन कारोबारियों के लाइसेंस या पंजीकरण की वैधता 31 मार्च तक है, उन्हें फिलहाल नवीनीकरण कराना होगा। इसके बाद नए नियम पूरी तरह लागू हो जाएंगे।
एक नजर में
• हर साल फूड लाइसेंस नवीनीकरण की अनिवार्यता समाप्त
• नगर निकाय में पंजीकृत स्ट्रीट वेंडर स्वतः एफएसएसएआई में पंजीकृत
• पंजीकरण की टर्नओवर सीमा 12 लाख से बढ़ाकर 1.5 करोड़
• राज्य लाइसेंस की सीमा 5 करोड़ से बढ़ाकर 50 करोड़
• जोखिम आधारित निरीक्षण प्रणाली लागू
