Bareilly: आईआईए ने केंद्र से एमएसएमई इकाइयों में गैस संकट के समाधान की उम्मीद जताई

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। एलपीजी और औद्योगिक गैस की आपूर्ति में रुकावट के कारण कई एमएसएमई इकाइयों ने विनिर्माण गतिविधियों के प्रभावित होने की बात कही है, जिस पर इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) ने भी चिंता जताई है। आईआईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गोयल ने कहा है कि वर्तमान स्थिति गैस की वास्तविक कमी से कहीं अधिक रसद और आपूर्ति श्रृंखला से संबंधित है। उन्होंने इसके समाधान के लिए केंद्र सरकार और संबंधित आपूर्ति एजेंसियों के हस्तक्षेप और समन्वय की उम्मीद जताई है।

आईआईए अध्यक्ष ने कहा है कि संस्था को इस समस्या के कारण बंद हुई औद्योगिक इकाइयों की संख्या के संबंध में पुष्ट आंकड़े प्राप्त नहीं हुए हैं। हालांकि, उसने देश भर में अपने सदस्यों से गैस संकट के कारण हो रही परिचालन संबंधी कठिनाई, उत्पादन में व्यवधान या बंद होने की सूचनाएं मांगी हैं ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें उचित मंच पर रखा जा सके।

दिनेश गोयल ने कहा, गैस की कमी से भट्टियों, हीटिंग सिस्टम और प्रसंस्करण इकाइयों में गैस का उपयोग करने वाले उद्योग भी काफी प्रभावित होते हैं। इंडक्शन-आधारित भट्टियां और हीटिंग सिस्टम जैसे इलेक्ट्रिक विकल्प कुछ औद्योगिक प्रक्रियाओं में आंशिक समाधान ही प्रदान कर सकते हैं। उनकी व्यवहारिकता तकनीकी उपयुक्तता और बिजली लागत पर भी निर्भर करेगी। उन्होंने कहा, संस्था स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और हितधारकों के साथ संपर्क में है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एमएसएमई के संचालन में गंभीर रूप से बाधा न आए।

ये उद्योग सबसे ज्यादा संकट में
पैकेजिंग सामग्री निर्माण, प्लास्टिक घटक और एक्सट्रूजन इकाइयां, ऑटो पार्ट्स निर्माण इकाइयां, मशीनरी निर्माण और फेब्रिकेशन इकाइयां, रखरखाव और इंजीनियरिंग कार्यशालाएं, बिस्कुट और बन बनाने वाली बेकरी यूनिट और कांच और चूड़ी ढलाई इकाइयां, विशेष रूप से फिरोजाबाद में।

भविष्य में गैस पर निर्भरता कम करने की भी कोशिश
आईआईए गैस आधारित प्रक्रियाओं पर निर्भरता कम करने के लिए दीर्घकालिक समाधानों पर भी काम कर रहा है। बताया गया कि इस दिशा में उसने आईआईटी रुड़की, आईआईटी वाराणसी और आईआईटी धनबाद सहित प्रमुख तकनीकी संस्थानों के साथ परामर्श शुरू किया है। ताकि औद्योगिक गैस खपत कम करने की तकनीक, लघु एवं मध्यम उद्यमों की विनिर्माण प्रक्रियाओं के लिए वैकल्पिक ऊर्जा विकल्प और टिकाऊ उत्पादन प्रणालियों जैसी संभावनाओं का पता लगाया जा सके।

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