LPG History in India: जानें भारत में पहली बार LPG गैस का इस्तेमाल कब हुआ
नई दिल्ली: दुनिया भर में ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ रही है, जहां ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव से होर्मुज स्ट्रेट का व्यापार प्रभावित हो सकता है। ऐसे में भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता अहम है। आइए नजर डालते हैं भारत में एलपीजी (LPG) के इतिहास पर—कब और कहां से शुरू हुई यह सफर जो आज करोड़ों घरों की रसोई का आधार बनी है।
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भारत में एलपीजी का पहला कदम दिसंबर 1955 में उठा, जब मुंबई (तब बॉम्बे) में Burmah Shell Oil Company ने 'Burshane' ब्रांड के तहत पैक्ड LPG सिलेंडर लॉन्च किए। यह देश में पहली बार घरेलू उपयोग के लिए LPG उपलब्ध हुई। इससे पहले ज्यादातर परिवार लकड़ी, कोयला या मिट्टी के तेल पर निर्भर थे, जो धुआं और समय दोनों की बर्बादी करते थे। Burmah Shell ने भारतीय खाना पकाने की शैली को ध्यान में रखते हुए दो-रिंग वाले स्पेशल बर्नर भी पेश किए, जो पारंपरिक चूल्हों की जगह लेने में सक्षम थे।
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शुरुआत में यह गैस आयात की जाती थी, लेकिन बाद में मुंबई की महुल रिफाइनरी से इसका उत्पादन शुरू हुआ। हालांकि शुरुआती दौर में लोग सुरक्षा को लेकर संशय में थे, इसलिए ग्राहक बहुत कम थे—केवल बड़े शहरों तक सीमित।
Indane ने दी असली उड़ान
एलपीजी को आम आदमी तक पहुंचाने का बड़ा क्रेडिट इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) को जाता है। उन्होंने 'Indane' ब्रांड लॉन्च किया और पहला Indane LPG कनेक्शन 22 अक्टूबर 1965 को कोलकाता में जारी किया गया। शुरुआत में सिर्फ 2,000 ग्राहक थे, जो मुख्य रूप से कोलकाता और पटना जैसे शहरों तक थे। लेकिन धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ती गई।
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मील के पत्थर
- 1967: भारत में पहली बार स्वदेशी LPG सिलेंडरों का निर्माण शुरू हुआ—हैदराबाद की ऑलविन फैक्ट्री से हुई था।
- आज भारत में Indane, Bharatgas और HP Gas जैसे ब्रांड करोड़ों घरों में स्वच्छ ईंधन पहुंचा रहे हैं, खासकर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के जरिए गरीब परिवारों तक।
एलपीजी ने न सिर्फ रसोई को साफ-सुथरा बनाया, बल्कि महिलाओं का समय बचाया और स्वास्थ्य को बेहतर किया।
