कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट: 100 डॉलर से नीचे फिसला, 6% से ज्यादा का झटका!
नई दिल्लीः कच्चे तेल की कीमतों में मंगलवार को बड़ी राहत वाली गिरावट दर्ज की गई है। मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बावजूद, कीमतें तेजी से लुढ़क गईं। एक दिन पहले सोमवार को ब्रेंट क्रूड और WTI दोनों 119 डॉलर के आसपास पहुंचकर तीन साल से ज्यादा के उच्च स्तर पर थे, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने बाजार को राहत दी।
ट्रंप ने संकेत दिए कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष "बहुत जल्द" या "काफी हद तक पूरा" हो सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी अभियान शुरुआती अनुमानों से कहीं आगे बढ़ चुका है और युद्ध "बहुत जल्द" समाप्त हो सकता है। इस बयान से वैश्विक तेल आपूर्ति में लंबे व्यवधान की आशंका कम हुई, जिससे कीमतों पर दबाव पड़ा।
कीमतों का अपडेट (मंगलवार, 10 मार्च 2026):
- ब्रेंट क्रूड: लगभग 6-10% की गिरावट के साथ 88-90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचा (सोमवार को उच्च स्तर 119.50 डॉलर था)।
- WTI क्रूड: करीब 6-6.5% टूटकर 88-89 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया (सोमवार को 119.48 डॉलर तक पहुंचा था)।
यह गिरावट इसलिए आई क्योंकि ट्रंप के बयानों से बाजार में यह उम्मीद जगी कि संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है। हालांकि ईरान की IRGC ने चेतावनी दी कि युद्ध कब खत्म होगा, इसका फैसला वे करेंगे और यदि हमले जारी रहे तो तेल निर्यात पूरी तरह रोक दिया जाएगा।
इसके अलावा, ट्रंप रूस पर तेल प्रतिबंधों में ढील और आपातकालीन भंडार जारी करने जैसे कदमों पर विचार कर रहे हैं, जो कीमतों को और नियंत्रित कर सकता है। कुछ खाड़ी देशों ने उत्पादन कटौती और 'फोर्स मेज्योर' घोषित किया है, लेकिन ट्रंप के आश्वासन ने बाजार को संतुलित किया।
आगे क्या?
मार्केट एनालिस्टों का मानना है कि कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हालिया घटनाओं को देखते हुए तेल 75 से 105 डॉलर प्रति बैरल के बीच कारोबार कर सकता है। वैश्विक आपूर्ति पर निर्भर करेगा कि संघर्ष कितनी जल्दी समाप्त होता है।
यह खबर निवेशकों और उपभोक्ताओं के लिए राहत की है, क्योंकि ऊंची कीमतें महंगाई को बढ़ावा देती हैं। बाजार अभी भी संवेदनशील है, इसलिए किसी भी नई घटना से फिर उछाल आ सकता है।
