महिला आरक्षण का विरोध पड़ा भारी, दोनों सदनों में विपक्षी दलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित
लखनऊ, अमृत विचार : लोकसभा में नारी शक्ति वंदन संविधान संशोधन विधेयक पारित न होने के मुद्दे पर बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश विधानमंडल के विशेष सत्र के दौरान दोनों सदनों विधानसभा और विधान परिषद में समाजवादी पार्टी (सपा) तथा कांग्रेस समेत 'इंडिया' गठबंधन में शामिल दलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया।
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने सदन में प्रस्ताव के समर्थन में भारी बहुमत के मद्देनजर इसके पारित होने की घोषणा की। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने इस निंदा प्रस्ताव का विरोध किया। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के संसदीय चुनावों से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक 17 अप्रैल को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया था।
सदन में 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026' पर हुए मतदान के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट डाले गए थे। इससे पहले संसदीय कार्य व वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सदन के समक्ष प्रस्ताव रखते हुए कहा, '' हम महिलाओं की सशक्त भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पूर्णत: प्रतिबद्ध हैं और जब तक नारी शक्ति को नीति निर्माण में उचित अधिकार नहीं मिल जाता, हम नारी सशक्तिकरण के विरोधियों की निंदा और विरोध करते रहेंगे।'' विधान परिषद में नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने निंदा प्रस्ताव रखा जो सदन में ध्वनि मत से पारित हो गया। विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद सभापति ने सदन के अनिश्चितकाल तक के लिए स्थगित कर दिया।
विधानसभा में संसदीय कार्य मंत्री ने सदन के पटल पर रखे छह अध्यादेश
उत्तर प्रदेश विधानसभा में बृहस्पतिवार को 'नारी सशक्तिकरण' विषय पर बुलाये गये एक दिवसीय विशेष सत्र में संसदीय कार्य व वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने छह अध्यादेश सदन के पटल पर रखे। खन्ना ने सदन के पटल पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अधिकरण) (संशोधन) अध्यादेश, 2026, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश, 2026, उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय अध्यादेश, 2026, उप्र दंड विधि (अपराधों का शमन और विचारणों का उपशमन) (संशोधन) अध्यादेश, 2026 और उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को पटल पर रखा।
