एसी, तीन बार चाय... नाइजीरियाई छात्र के हास्यपूर्ण भाषण ने एएमयू में चुनाव की पुरानी यादें ताजा कर दीं
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के छात्रावासों में एयर कंडीशनर और वॉशिंग मशीन की व्यवस्था करने के साथ 'दिन में कम से कम तीन बार' चाय उपलब्ध कराने के वादे ने विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों में परिसर के चुनाव की पुरानी यादें ताजा कर दी हैं। ये वादे एएमयू के एक नाइजीरियाई छात्र ने अपने हास्यपूर्ण 'चुनावी' भाषण में किये जो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इस भाषण में चाय को परिसर का 'आधिकारिक पेय' बताया गया।
इस सप्ताह की शुरुआत में एक छात्रावास में एक सांस्कृतिक और साहित्यिक उत्सव के दौरान केमिकल इंजीनियरिंग के छात्र अय्यूबा गॉड्सविल द्वारा दिया गया हास्यपूर्ण हिंदुस्तानी भाषण सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है जिसने परिसर से परे के लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। अतिरंजित 'चुनावी वादों' के माध्यम से गॉड्सविल ने चुनावी भाषणों की उस पुरानी शैली की याद दिला दी जिसका इस्तेमाल सालों पहले अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव में किया जाता था।
कई पूर्व छात्रों का कहना है कि यह हास्यपूर्ण भाषण संस्थान की वाद-विवाद, हास्य और वक्तृत्व की समृद्ध संस्कृतिक परंपरा को दर्शाता है। 'नदीम तारिन' छात्रावास में आयोजित 'ओपन यूनिवर्सिटी कल्चरल एंड लिटरेरी फेस्ट' 'फरोजान' के दौरान विदेशी छात्र ने हिंदी भाषा में छात्र संघ के 'नकली चुनाव' से जुड़ा भाषण दिया।
छात्र ने भाषण में छात्रों से वादा किया कि अगर वह छात्रावास के सेक्रेटरी बने, तो वह छात्रावास के साथियों के लिए एयर कंडीशनर, हर मंजिल पर वॉशिंग मशीन, दिन में तीन बार चाय, एक स्विमिंग पूल और एक मेट्रो रेल सेवा सुनिश्चित करेंगे 'क्योंकि कॉलेज एनटी से बहुत दूर है'। एएमयू के इतिहासकार राहत अबरार के अनुसार, भाषण गहराई के साथ ध्वनित हुआ क्योंकि इसने 'संस्था की उस आभा को दिखाया जो अब लुप्त हो रही है"।
अबरार ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, "पुरानी यादें दो तरह की हैं – यह लोगों को उस समय की याद दिलाती है जब व्यंग्य और सार्वजनिक भाषण विश्वविद्यालय परिसर का अभिन्न अंग थे, और जब सआदत हसन मंटो, जावेद अख्तर और नसीरुद्दीन शाह जैसी हस्तियों ने यहां अपने कौशल को निखारा था।'' गॉड्सविल ने उस भाषण शैली और नाटकीय अंदाज की नकल की, जो कुछ साल पहले एएमयू छात्र संघ चुनावों की पहचान हुआ करती थी—ये चुनाव मुख्य रूप से परिसर जीवन, सामाजिक गतिविधियों और छात्र कल्याण पर केंद्रित होते थे, न कि मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों से जुड़े मुद्दों पर।
भाषण में छात्रावास की बेहतर सुविधाओं और असीमित चाय समेत उनके अन्य चुटीले आश्वासनों ने हंसी और तालियां बटोरीं, हालांकि उन्होंने समकालीन संदर्भ में अभियान संस्कृति की विडंबना को प्रतिबिंबित किया। अबरार ने कहा कि प्रतिक्रिया नुकसान की भावना को भी दर्शाती है, क्योंकि एएमयू में लगभग एक दशक से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा, ''हाल के वर्षों में जब चुनाव हुए भी, तो वे पहले जैसे नहीं रहे जब वक्तृत्व कौशल आपको खड़ा करता है, ना कि आपका बाहुबल।''
इस भाषण ने विश्वविद्यालय के चरित्र में एक और बदलाव की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है, वह है विदेशी छात्रों की संख्या में गिरावट जो एक समय एएमयू के महानगरीय परिवेश की एक खास विशेषता थी। अबरार ने कहा, ''1950 से 1980 के दशक में एएमयू ने अफ्रीका, ईरान, थाईलैंड और विकासशील दुनिया के अन्य हिस्सों से कुछ प्रतिभाशाली छात्रों को आकर्षित किया। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर के जीवन में सक्रिय रूप से भाग लिया और अपने साथ भारत का एक हिस्सा वापस ले गए।"
विदेशी छात्र एक समय छात्र संघ की गतिविधियों में गहराई से शामिल थे, मोहम्मद अमीन बुलबुलिया जैसे लोग 1953 में संघ अध्यक्ष के रूप में भी कार्यरत थे। एएमयू ने एक सांस्कृतिक और राजनयिक केंद्र के रूप में भी काम किया, जब गमाल अब्देल नासिर और ईरान के शाह जैसे वैश्विक नेताओं ने परिसर का दौरा किया। आज विदेशी छात्रों की संख्या में काफी कमी आई है।
एएमयू में विदेशी छात्रों के निदेशक नावेद खान के अनुसार, विश्वविद्यालय में वर्तमान में लगभग 160 विदेशी छात्र हैं (जिनमें से ज्यादातर बांग्लादेश और अफगानिस्तान से हैं) जो 1960 के दशक में मौजूद रहे विदेशी छात्रों की संख्या का लगभग दसवां हिस्सा है। खान ने कहा कि एएमयू की पहचान के इस पहलू को पुनर्जीवित करने के प्रयास चल रहे हैं, जिसमें अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए "एकल-खिड़की" प्रवेश प्रणाली और अगले शैक्षणिक सत्र से समर्पित छात्रावास सुविधाओं की योजना शामिल है।
