कोल्ड स्टोरेज के बाहर ट्रालियों पर रतजगा कर रहे अन्नदाता, भंडारण अव्यवस्था से किसान परेशान
बाराबंकी, अमृत विचार। जिले में आलू की बंपर पैदावार के बाद अब भंडारण को लेकर किसानों की परेशानियां खुलकर सामने आने लगी हैं। मंडियों में आलू का भाव गिरकर 450 से 500 रुपये प्रति कुंतल तक पहुंच गया है, जो किसानों की लागत से भी कम बताया जा रहा है। ऐसे में किसान आलू बेचने के बजाय कोल्ड स्टोरेज में रखने को मजबूर हैं, लेकिन यहां भी उन्हें भारी अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है।
देवा क्षेत्र के कई कोल्ड स्टोरेज के बाहर इन दिनों आलू लदी ट्रालियों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। अपनी बारी का इंतजार करते हुए किसान पूरी-पूरी रात ट्रालियों पर जागकर गुजारने को मजबूर हैं। कई किसानों का कहना है कि टोकन मिलने के बाद भी समय पर आलू जमा करने का मौका नहीं मिल पा रहा है।
किसानों के मुताबिक कई शीतगृहों में टोकन प्रणाली में अनियमितताएं सामने आ रही हैं। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर कुछ लोगों का आलू पहले जमा कराया जा रहा है, जबकि दूर-दराज से आए किसान कई-कई दिनों से लाइन में खड़े हैं। इसके साथ ही मजदूरों की कमी के कारण आलू उतारने और भंडारण की प्रक्रिया भी काफी धीमी हो गई है, जिससे ट्रालियों की कतारें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
जिले में इस समय 77 कोल्ड स्टोरेज संचालित हैं, जिनकी कुल भंडारण क्षमता करीब 7.50 लाख मीट्रिक टन है, जबकि इस वर्ष जिले में लगभग 8.50 लाख मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हुआ है। अब तक शीतगृहों में करीब 70 प्रतिशत आलू का भंडारण किया जा चुका है, जिससे आगे जगह मिलने को लेकर भी किसानों में चिंता बढ़ गई है।
देवा क्षेत्र के आलू व्यवसायी दीपक सिंह का कहना है कि इस बार आलू की पैदावार ज्यादा हुई है और दाम गिर गए हैं। ऐसे में किसान बेहतर कीमत की उम्मीद में आलू को कोल्ड स्टोरेज में रखना चाहते हैं, लेकिन व्यवस्थाएं कमजोर होने के कारण उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यदि भंडारण व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं किया गया तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। फिलहाल कोल्ड स्टोरेज के बाहर ट्रालियों पर रात गुजारते हुए अपनी बारी का इंतजार कर रहे किसान व्यवस्था से नाराज नजर आ रहे हैं।
