Bareilly : प्रदेश में रोल मॉडल बना बीडीए का वित्तीय मॉडल
अवैध निर्माणों पर कठोर वार और नई आवासीय योजनाओं के जरिये की रिकॉर्ड कमाई
बरेली, अमृत विचार। बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने अपनी कार्यप्रणाली से प्रदेश भर में नई मिसाल पेश की है। शहर के पीलीभीत बाईपास और बीसलपुर रोड के मध्य रामगंगा नगर और ग्रेटर बरेली जैसी अत्याधुनिक कॉलोनियों को विकसित कर प्राधिकरण ने तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड राजस्व अर्जित किया है। बीडीए की सफलता को देखते हुए शासन ने अब प्रदेश के अन्य विकास प्राधिकरणों को भी बीडीए मॉडल का अध्ययन करने और उसे लागू कर अपनी आर्थिकी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
बीडीए ने राजस्व अर्जन के साथ-साथ शहर के सौंदर्यीकरण और बुनियादी सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया है। पुराने समय में जहां अवैध निर्माणों पर कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रहती थी, वहीं अब कठोर रुख अपनाते हुए ध्वस्तीकरण कार्रवाई करने और शमन शुल्क के माध्यम से प्राप्त आय का उपयोग शहर के सभी प्रमुख प्रवेश मार्गों को फोरलेन और सिक्स-लेन में बदलने के लिए कर रहा है। इन मार्गों पर भव्य प्रवेश द्वार तैयार किए जा रहे हैं। नाथ नगरी के रूप में विख्यात बरेली के इन प्रवेश द्वारों को भगवान शिव और शहर के सात प्राचीन शिव मंदिरों के नाम पर पहचान दी जा रही है, जिससे विकास के साथ-साथ आध्यात्मिक विरासत का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।
शासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में विशेष रूप से बीडीए की ओर से बीते तीन वर्षों में उठाए गए कदमों का उल्लेख किया गया है। अन्य प्राधिकरणों को निर्देश दिए हैं कि वह बीडीए की तर्ज पर नए आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स लॉन्च करें और अवैध निर्माणों पर सख्ती बरतते हुए वित्तीय संसाधनों को सुदृढ़ करें। इसके अतिरिक्त, शासन ने कुछ नए नवाचारों को जोड़ने का भी सुझाव दिया है, ताकि शहरी निकायों की आय के स्रोतों में विविधता लाई जा सके। शासन के इस आदेश के बाद बीडीए के अफसरों में उत्साह है। बीडीए के अधिकारियों का मानना है कि इस मॉडल की सफलता का मुख्य कारण पारदर्शी प्रक्रिया और समयबद्ध विकास रहा है।
बीडीए ने तीन साल में बदली तस्वीर
पांच साल पूर्व तक बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) ठप पड़ी आवासीय योजनाओं और वित्तीय संकट के कारण सफेद हाथी माना जाने लगा था। रामगंगा नगर जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं सालों तक फाइलों में दबी रहीं और जमीनों पर कब्जे होते रहे। बीते तीन वर्षों में बीडीए ने इस सुस्ती को पीछे छोड़कर तीन हजार करोड़ से अधिक का राजस्व जुटाकर सबको चौंका दिया है। प्राधिकरण ने न केवल रामगंगा नगर के विवाद सुलझाकर उसे प्रदेश की मॉडल कॉलोनी बनाया, बल्कि ग्रेटर बरेली जैसी नई परियोजना से शहर का दायरा बढ़ाया।
बीडीए मॉडल को प्रदेश भर में लागू करने का निर्णय हमारे पारदर्शी कार्य और टीम वर्क का परिणाम है। हमने अवैध निर्माणों पर सख्ती और रामगंगा नगर जैसी समयबद्ध परियोजनाओं से तीन हजार करोड़ का रिकॉर्ड राजस्व जुटाया है। अब हमारी प्राथमिकता इस आय का उपयोग नाथ नगरी की सांस्कृतिक पहचान संवारने और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा विकसित करने में करना है। -डा. मनिकंडन ए. बीडीए वीसी।
