ईद की बाजारों में रौनक: डिजाइनर टोपियों और सेवइयों से पटा बाजार, जुटे खरीदार
लखनऊ। साप्ताहिक बंदी वाले दिन ईद से पहले पड़े आखिरी गुरुवार को बाजारों में जबरदस्त भीड़ नजर आई। कोई पसंदीदा सेवईं खरीदता दिखा तो कोई इबादत के दौरान पहने जानी वाली डिजाइनर टोपियों को पसंद करते देखे गए। पुराने शहर के सभी प्रमुख बाजारों में बुर्कानशीं का हुजूम खरीदारी करते दिखा।
ईद पर पहने जाने वाले कपडे़, कुर्ता-पायजामा, चूड़ियां आदि तमाम चीजों के खरीदार बड़ी संख्या में बाजारों में दिखे। नजीराबाद, अमीनाबाद, मौलवीगंज, नक्खास, चौक, चौपटिया समेत पुराने लखनऊ के तमाम बाजारों में रात तक रौनक देखने को मिली। माह-ए-रमजान अब अपने आखिरी पड़ाव पर है और इसके साथ ही शहर के पुराने बाजारों में ईद की रौनक चरम पर दिखी। पुराने लखनऊ के बाजारों का हर मार्ग जाम था।
टोपियों: फैशन और परंपरा का संगम
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इबादत और रमजान का जिक्र हो और टोपियों की बात न हो, ऐसा संभव नहीं। इस बार बाजार में पारंपरिक के साथ-साथ आधुनिक डिजाइन की टोपियों का जबरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है। अमीनाबाद के टोपी विक्रेता अख्तर आलम के अनुसार, रमजान के दौरान टोपियों की बिक्री सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है। इस समय बाजार में लोकल के साथ अफगानी, इंडोनेशियाई, तुर्की और बांग्लादेशी टोपियां छाई हुई हैं।
ट्रेंडिंग टोपियां:
इस सीजन ‘ओवैसी टोपी’ खासा चर्चा में है, जो गोल और नरम कपड़े की होती है। इसकी कीमत 200 से 500 रुपये के बीच है। इसके अलावा मुमताज और फिरोज टोपी की भी अच्छी मांग बनी हुई है। अख्तर आलम बताते हैं कि इस बार सबसे ज्यादा डिमांड पट्टा गोल और जरवी कॉटन टोपियों की है, जिन्हें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और रामपुर से मंगवाया गया है।
हर बजट के लिए विकल्प
बाजार में 50 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक की टोपियां उपलब्ध हैं। इंडोनेशिया टोपी 20-50 रुपये, जरवी कॉटन टोपी 30-120 रुपये, चिकन लखनवी टोपी 40-60 रुपये, बांग्लादेशी टोपी 80-200 रुपये, अफगानी टोपी 60-100 रुपये, बरकाती गोल टोपी 100 से 1000 रुपये तक। रंग-बिरंगी और सादी दोनों तरह की टोपियां ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं।
रिश्तों की मिठास से महकता सेवइयों का बाजार
ईद के मौके पर सेवइयों की खरीदारी भी जोरों पर है। नक्खास और चौक बाजारों में 60 से 250 रुपये प्रति किलो की रेंज में किमामी, लच्छेदार, बनारसी और फेनी सेवइयों की खूब बिक्री हो रही है। दूध वाली और सूखी किमामी सेवइयों के साथ-साथ रोस्टेड सेवइयों की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। बनारसी सेवईं में भी कई वेराइटी आ गई हैं।
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भट्ठी में भुनी सेवईं के अलावा इस बार ओवन में भुनी बनारसी सेवईं भी आई है जो एक रंग और एक सी पकी हुई है। यह भी खूब बिक रही है। जर्दे के शौकीन लोगों के लिए मजाफर सेवईं भी मिल रही है। इसके अलावा लखनऊ की पहचान महीन व मीडियम सेवईं तो इस बार भी सबसे ज्यादा बाजार में मौजूद है, जिसे दूर-दूर से लोग खरीदने के लिए आ रहे हैं। दुकानदारों के अनुसार, इस बार सेवइयों की बिक्री पिछले वर्षों की तुलना में अधिक हो रही है।
