Bareilly : लैब टेस्टिंग में 11 फर्मों के सैंपल फेल, ब्लैकलिस्ट की लटकी तलवार
नगर आयुक्त ने परखी थी 17 फर्मों के निर्माण कार्य की गुणवत्ता
बरेली, अमृत विचार। स्मार्ट सिटी में विकास के नाम पर बिछाई जा रही सड़कों और नालियों के नीचे दबे भ्रष्टाचार की परतें उखड़ने लगी हैं। नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य की ओर से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर कराई गई जांच में इसका खुलासा हुआ है। 17 प्रमुख फर्मों के कार्यों की लैब टेस्टिंग कराई गई थी, इनमें 11 फर्मों का काम निर्धारित मानकों की कसौटी पर खरा नहीं उतरा। इसपर नगर आयुक्त ने कड़ा रुख अपनाते हुए न केवल भारी जुर्माना लगाने, बल्कि ऐसी फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इससे ठेकेदारों में खलबली मची हुई है।
दरअसल, पिछले दिनों शहर में हो रहे विकास कार्यों की हकीकत जानने के लिए नगर आयुक्त खुद फील्ड में उतरे थे। जांच के दौरान कई स्थानों पर सड़क और नालियों का निर्माण इतना घटिया पाया गया कि हाथ लगाते ही पोल खुलकर सामने आ गई। मुख्य अभियंता मनीष अवस्थी और इंजीनियरों की टीम के सामने नगर आयुक्त ने तत्काल प्रभाव से मानक विहीन सड़कों और नालियों को दोबारा खोदने के निर्देश दिए थे। बताया गया कि पहले चरण में 30-30 लाख रुपये की लागत वाले उन कार्यों को निशाने पर लिया गया, जो नगर निगम निधि, 15 वें वित्त आयोग और एनकैप परियोजना के तहत कराए गए थे। जांच में मैसर्स गिरीश पाराशरी, कुंवर कंसट्रक्शन, एसपीएस कंसट्रक्शन, सूरी डेवलपर्स, कुमार एंड कंपनी, एपी कंसट्रक्शन, अंजनी बिल्डर्स, एमबी कंस्ट्रक्शन और एसपी कंस्ट्रक्शन जैसी फर्मों के कार्य अधोमानक पाए गए। यानी निर्माण में सीमेंट और कंक्रीट की जगह केवल खानापूर्ति की गई। इन फर्मों पर अब न केवल जुर्माने की तलवार लटक रही है, बल्कि भविष्य में इनके ब्लैकलिस्ट होने का खतरा भी मंडरा रहा है।
दूसरे चरण में कई नामी फर्में निशाने पर
नगर आयुक्त की इस कार्रवाई ने ठेकेदारों के उस सिंडिकेट को हिला दिया है, जो अब तक रसूख के दम पर घटिया निर्माण को फाइलों में ''ओके'' कराते आए थे। दूसरे चरण में उन दिग्गज फर्मों के कार्यों की लैब टेस्टिंग होगी, जो खुद को जांच की आंच से ऊपर मानती रही हैं। यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुसार नहीं मिला तो कार्रवाई तय है।
विकास कार्यों में मानक विहीन सामग्री का उपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लैब टेस्टिंग में जिन 11 फर्मों के नमूने फेल हुए हैं, उन पर भारी जुर्माना लगाने और ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू होगी। घटिया सड़कों को उखाड़कर दोबारा बनवाया जाएगा। जनता के पैसे की बंदरबांट करने वाले ठेकेदारों और इसमें संलिप्त संबंधित अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई तय है। -संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त।
