तेल, पेट्रोल व गैसोलीन : ईंधन में कैसे परिवर्तित होता है कच्चा तेल
सिडनी : अमेरिका और इजराइल का ईरान के साथ बढ़ता सैन्य संघर्ष कच्चे तेल के वैश्विक बाजार को प्रभावित कर रहा है। फारस की खाड़ी में स्थित हॉर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने और पश्चिम एशिया के तेल उत्पादन केंद्रों पर हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है। दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस का लगभग 20 प्रतिशत इसी मार्ग से गुजरता है।
इस मार्ग में बाधा आने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में करीब 34 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वैश्विक मानक कच्चा तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमत अब 100 अमेरिकी डॉलर प्रति 'बैरल' से अधिक हो गई है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर सीधे पेट्रोल और गैसोलीन जैसे उत्पादों पर पड़ता है, जिससे आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की लागत बढ़ जाती है। लेकिन आखिरकार कच्चे तेल को उस ईंधन में कैसे बदला जाता है जिसे आप अपनी कार में भरते हैं? यह प्रक्रिया ठीक वैसी ही है जैसे पास्ता सॉस को धीमी आंच पर पकाना।
अधिकांश उपभोक्ता तब चकित हो जाते हैं जब तेल की कीमत प्रति बैरल 100 अमेरिकी डॉलर से ऊपर चली जाती है। लेकिन आर्थिक हकीकत इससे काफी जटिल और दीर्घकालिक होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि बैरल के भीतर मौजूद कच्चा तेल सीधे उपयोग में नहीं लाया जा सकता। असल में इसे रासायनिक क्रियाओं के जरिये विभाजित (फ्रैक्शन)किया जाता है, ताकि उन रसायनों को अलग किया जा सके, जिनसे 6,000 से अधिक रोज़मर्रा की वस्तुएं बनाई जाती हैं। इन घरेलू वस्तुओं में शामिल हैं: पहने जाने वाले वस्त्र और कपड़ों के रंग, हमारे हाथों में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और हमारे शरीर को नियंत्रित करने वाली दवाएं। इनमें से कुछ उत्पादों को गैर पेट्रोलियम विकल्पों से बदला जा सकता है। लेकिन ऐसा करने पर उपभोक्ता कीमतें कई गुना बढ़ सकती हैं। कच्चे तेल को इन उत्पादों में बदलने की प्रक्रिया रसायन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में संचालित की जाती है, जिसमें उच्च तापमान वाले पात्र (जिन्हें "कॉलम" कहा जाता है) द्रवों को अलग-अलग घनत्व वाले उत्पादों में विभाजित ("फ्रैक्शन किया") करने की अनुमति देते हैं। यह अनुभव ठीक वैसा ही है जैसे पास्ता सॉस को धीमी आंच पर पकाना, जहां रसोइया सही तापमान का उपयोग करके पानी (कम घनत्व वाला पदार्थ) उबालकर भाप में उड़ाता है और उस रसायन को सघन करता है जो टमाटरों का स्वाद बढ़ाता है। क्रमानुसार विभाजन---
सादे टमाटर में मौजूद सैकड़ों रसायनों के विपरीत, एक बैरल तेल में मौजूद हजारों-हजार अलग-अलग रसायन के कारण, इनको अलग करने के लिए पांच से दस ''फ्रैक्शन कॉलम'' को क्रमिक रूप से लगाया जाता है, जहां प्रत्येक कॉलम पिछले की तुलना में अधिक सटीक उत्पाद तैयार करता है। सबसे हल्का उत्पाद प्राकृतिक गैस होता है, जिसका इस्तेमाल घरेलू और औद्योगिक ईंधन के रूप में किया जाता है। इसके बाद गैसोलीन (पेट्रोल) निकलता है, जो एक बैरल तेल के लगभग आधे हिस्से के बराबर होता है। अधिक तापमान पर केरोसिन (जेट ईंधन) और उससे भी अधिक तापमान पर डीजल अलग किया जाता है, जो एक बैरल तेल का लगभग एक चौथाई हिस्सा होता है। सबसे भारी हिस्सों को अलग करने के लिए अत्यधिक तापमान की आवश्यकता होती है। इनसे सड़क निर्माण में उपयोग होने वाला डामर, रबर, सिंथेटिक कपड़े, प्लास्टिक और कॉस्मेटिक उत्पादों के लिए रसायन बनाए जाते हैं।
सभी तेल एक जैसे नहीं होते
कच्चे तेल की संरचना हर जगह एक जैसी नहीं होती। लाखों वर्षों में धरती के भीतर दबाव और तापमान के कारण मृत पौधों और जीवों के अवशेषों से तेल बनता है। क्योंकि हर क्षेत्र की भौगोलिक और जैविक परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं, इसलिए वहां बनने वाले कच्चे तेल की रासायनिक संरचना भी अलग-अलग होती है। यही कारण है कि किसी एक प्रकार के तेल को दूसरे के स्थान पर सीधे इस्तेमाल करना संभव नहीं होता। रिफाइनरी के 'फ्रैक्शनेशन कॉलम' को स्थिर रूप से काम करने में कई महीने लगते हैं और उनकी कार्यक्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि अंदर किस प्रकार का कच्चा तेल डाला जा रहा है। इस बीच, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर आने वाले समय में ईंधन की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
