KP Oli Arrested: नेपाल में सत्ता बदलते ही पूर्व प्रधानमंत्री पर सख्त एक्शन, जेन-जी हिंसा के आरोप में लिए गए हिरासत में

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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काठमांडूः नेपाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर आ गया है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पिछले साल हुए घातक जेन-जी विरोध प्रदर्शनों में कथित भूमिका के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। यह कार्रवाई नई सरकार के सत्ता में आने के महज कुछ दिनों के अंदर हुई है, जिससे देशभर में सियासी हलचल मच गई है।

ओली के साथ उनके पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को भी गिरफ्तार किया गया है। काठमांडू वैली पुलिस ने दोनों को शनिवार सुबह हिरासत में लिया और अब आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो गई है।

गिरफ्तारी पर दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया

नई सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक बदले की भावना से नहीं, बल्कि कानून के अनुसार की जा रही है। नए गृहमंत्री सुदन गुरूंग ने कहा, “वादा वादा होता है और कानून सबसे ऊपर है। दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।”

वहीं, केपी ओली ने अपनी गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है और कहा है कि वे कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।

जेन-जी आंदोलन क्या था?

पिछले साल सितंबर में नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जिन्हें जेन-जी आंदोलन नाम दिया गया। ये प्रदर्शन अचानक हिंसक रूप ले बैठे और महज दो दिनों में 70 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इस हिंसा के बाद ओली सरकार पर भारी दबाव बना और अंततः उनकी सरकार गिर गई थी।

जांच आयोग की रिपोर्ट ने खोला पर्दा

हाल ही में गठित उच्च स्तरीय जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा कि उस समय सत्ता में बैठे उच्च अधिकारियों ने हालात को नियंत्रित करने में लापरवाही बरती। आयोग ने केपी ओली, रमेश लेखक और नेपाल पुलिस के तत्कालीन महानिरीक्षक चंद्र कुबेर खापुंग समेत कई लोगों को जिम्मेदार ठहराया। रिपोर्ट में अधिकतम 10 साल तक की सजा की सिफारिश की गई थी।

नई सरकार ने आयोग की सिफारिशों को लागू करने का फैसला लिया है। गृहमंत्री गुरूंग ने इसे “न्याय की दिशा में पहला ठोस कदम” बताया और कहा कि देश को नई दिशा देने के लिए दोषियों पर कार्रवाई जरूरी है।

आगे क्या?

जांच आयोग ने केवल ओली और लेखक ही नहीं, बल्कि कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की है। ऐसे में आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

यह पूरा मामला अब नेपाल की न्याय व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया है। सत्ता परिवर्तन के साथ ही शुरू हुई यह कानूनी प्रक्रिया देश की भविष्य की राजनीति को भी प्रभावित कर सकती है।

 

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