संस्मरण: भविष्यफल
जब काम से छुट्टी हो, तो उदासीनता आ ही जाती है। कॉलेज की छुट्टियां चल रही है। समर ब्रेक ऐसा लग रहा है मानो जिंदगी पर ही ब्रेक लग गया हो। कुछ करने के लिए हो ही न और जब काम हो तो काम की थकान, हर रोज यही इच्छा होती है कि काश! आज छुट्टी मिल जाए। शायद हम इंसानों की फितरत ही ऐसी होती है, जो प्रत्यक्ष मिलता है उसमें कभी खुश नहीं रहते। इसी उधेड़बुन में मैंने मन बदलने के लिए फोन चलाना शुरु कर दिया।
कभी इंस्टाग्राम तो कभी फेसबुक, कभी यूट्यूब पर कहीं मन नहीं लगा। मैंने फोन पटक दिया। क्या करूं! चलो मैगजीन ही पढ़ लेती हूं, कुछ न कुछ ज्ञानवर्धक तो मिल ही जाएगा। यही सोचकर मैं मैगजींस निकाली और पढ़ने लगी । मैगजींस पढ़ते-पढ़ते काफी समय बीत गया। अच्छे लेखों को पढ़कर मन भी खुश हो गया। सच में किताबें हमारी सबसे अच्छी दोस्त होती है। तभी डोर बेल बजी.. “नैना” …“ओ मम्मी आ गई।” मैंने दरवाजा खोला। मम्मी बाजार से आ गई थीं और साथ में उनकी सहेली रीना आंटी भी आई थीं।
“क्या कर रही थी? इतनी देर से दरवाजा क्यों खोला। कब से बेल बज रही हूं। पानी भर के नहीं रखा? जरा थोड़ी देर के लिए कहीं चले जाओ पूरा घर अस्त-व्यस्त सा हो जाता है।” मम्मी बोले जा रहीं थीं।
“वो मैं मैगजींस...” “क्या मैं-मैं पूरा घर फैला रखा है।” मम्मी ने मेरी बात बीच में ही काटते हुए कहा। “ओहो..छोड़ो भी.. बच्ची है.. इधर-उधर बिजी हो गई होगी, अब कर देगी।” आंटी ने मेरा बचाव किया और मुझे मम्मी की डांट से बचाया। रीना आंटी की बात सुनकर मम्मी कुछ नरम पड़ी। रीना आंटी बहुत ही खुशमिजाज व बिंदास किस्म की महिला है। हर जगह हंसी-खुशी का माहौल बना ही देती है। कोई ऐसी वैसी बात हो,तो भी माहौल हल्का कर देती हैं।
एकदम अप टू डेट रहती हैं। सोशल मीडिया पर भी एक्टिव हैं। यह बात अलग है कि ज्यादातर अपडेट्स वह खुद न कर, अपनी बेटी से करती हैं। यूं तो उनका फिगर भी थोड़ा ज्यादा ही है, फिर भी कपड़े फैशन के हिसाब से ही पहनती हैं। उन्हें पिछड़ा हुआ रहना बिल्कुल पसंद नहीं। आजकल तो प्लाजो और जींस जमकर पहन रही हैं। कुल मिलाकर वह एकदम आधुनिक है। मम्मी ने कहा- “नैना आंटी के लिए चाय तो बना लो।” रीना आंटी ने जोड़ते हुए कहा “ और साथ में पापड़ भी”।
रीना आंटी मेरी निकली भी मैगजींस पढ़ने लगीं। तभी अचानक कुछ पढ़कर रीना आंटी विचिलित सी हो उठीं। उनको एकदम उदास हो गईं। मानो दिल डूब सा गया हो। वह उदास हो गईं। मैं चाय लेकर आई। आंटी गुमसुम सी बैठी थीं।
“क्या हुआ आंटी? अचानक से आप इतनी परेशान क्यों लग रही हैं?” मैंने पूछा। आंटी बोली “अरे भविष्यफल में कुछ भी ठीक नहीं निकला है इसलिए मेरा मन बेचैन सा हो रहा है।” मम्मी ने कहा- “ओ हो..इन सब चीजों को कोई इतनी गंभीरता से थोड़ी नहीं लेना होता है।” आंटी ने बोला- “अरे कुछ तो सच्चाई होती ही होगी न”।
मैंने पूछा- “अच्छा क्या लिखा है, जरा पढ़िए तो।” “आपका पूरा माह संघर्ष भरा रहेगा। किसी प्रियजन से मनमुटाव हो सकता है। आमदनी कम होगी व खर्च बढ़ेंगे”। आंटी ने दुखी होते हुए पढ़ा। मम्मी ने मुंह बनाकर कहा- “अरे सब फालतू की बातें हैं।” लेकिन रीना आंटी व्याकुल थी। अनायास ही उनकी हंसी कहीं गुम हो गई थी।
“ओफ्फो. आप लोग भी न छोड़िए यह सब।” आंटी मम्मी सही कह रही हैं, इन सबको इतनी गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। आप खुद ही सोचिए एक ही राशि के कितने सारे लोग होते हैं। यह कोई एक व्यक्ति विशेष आपके लिए ही नहीं है। “कम ऑन आंटी! डोंट बी सिली।”
मेरी बातों का आंटी पर कोई खास असर होता नजर नहीं आया। तभी मेरी नज़र मैगज़ीन के कवर पेज पर पड़ी।
“ओ माय गॉड! अब आप लोग अपनी मूर्खता ओर अंधविश्वास पर जोर से हंसने को तैयार हो जाइए, क्योंकि” मैंने मैगजीन उठाते हुए कहा।
“यह मैगजीन दो महीने पुरानी है, तो यह भविष्यफल भी दो महीने पुराना हुआ यानी बीत चुका है।” “ क्या!” रीना आंटी के चेहरे पर चमक लौट आई और वह हो-हो करके हंस पड़ी। फिर हम सभी ने सुकून से चाय नाश्ते का आनंद लिया।-श्रुति सुकुमार, बरेली
